विदर्भ, नागपुर और गडचिरोली की विकास यात्रा को मिला नया आयाम — अजय संचेती का CII मंच से बड़ा विज़न
📍 नागपुर | रविवार, 3 अगस्त 2025
राज्यसभा के पूर्व सांसद अजय संचेती ने रविवार को नागपुर में आयोजित ‘India@100: Charting Vidarbha’s Journey to a Developed India’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस सम्मेलन का आयोजन Confederation of Indian Industry (CII) द्वारा किया गया, जिसमें विदर्भ, नागपुर और गडचिरोली के औद्योगिक और लॉजिस्टिक विकास को लेकर गहन चर्चा हुई।
🔹 15 लाख करोड़ में से 35% निवेश सिर्फ विदर्भ को — विदर्भ को मिलेगा बड़ा लाभ
संचेती ने बताया कि,
> “मुख्यमंत्री ने दावोस में 15 लाख करोड़ रुपये के निवेश के समझौते किए हैं, जिनमें से 35 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले विदर्भ को मिली है। इस निवेश का बड़ा भाग विदर्भ क्षेत्र में लाया जा रहा है।”
यह विदर्भ के लिए औद्योगिक बदलाव की शुरुआत है, जो इसे भारत के विकास इंजन में बदल सकता है।
🔹 गडचिरोली: खनिज संपदा से बनेगा औद्योगिक हब
गडचिरोली, जो अब तक पिछड़ा और वंचित क्षेत्र माना जाता था, अब खनिज आधारित औद्योगिक विकास की दिशा में अग्रसर है।
> “गडचिरोली को औद्योगिक जिला घोषित करने की योजना पर काम चल रहा है। यहाँ की मिनरल वेल्थ — जैसे कोयला, बॉक्साइट, और लौह अयस्क — का शुद्ध दोहन कर MSMEs और ancillary industries को बढ़ावा मिलेगा।”
मुख्यमंत्री स्वयं इसके पालक मंत्री हैं और उन्होंने गडचिरोली को तेजी से प्रगतिशील जिले के रूप में उभारने का बीड़ा उठाया है।
🔹 नागपुर: भारत का लॉजिस्टिक्स सुपरहब बनने की दिशा में
अजय संचेती ने नागपुर की भौगोलिक और रणनीतिक क्षमता की सराहना करते हुए कहा:
> “नागपुर को देश और दुनिया का लॉजिस्टिक्स हब बनाया जा सकता है। यह शहर पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण के केंद्र में स्थित है, जहां से मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्टेशन संभव है।”
राज्य सरकार अब ऐसे उद्यमियों को प्रोत्साहित कर रही है जो 50–100 एकड़ जमीन लेकर उद्योग स्थापित करना चाहते हैं। संचेती ने बताया:
> “ऐसे प्रोजेक्ट्स को सरकार अब MIDC का दर्जा दे रही है, जो पहले कभी नहीं हुआ।”
🔹 स्थानीय उद्योगों से CII से जुड़ने का आह्वान
संचेती ने कहा कि विदर्भ के स्थानीय उद्योग संगठनों ने अच्छा काम किया है, लेकिन अब वक्त है कि वे CII जैसे राष्ट्रीय मंच से जुड़ें ताकि उनकी बात सीधे नीति निर्धारकों तक पहुंचे।
> “अगर हमें दिल्ली तक अपनी बात पहुंचानी है, तो हमें ऐसे मंचों की ज़रूरत है जो हमारी आवाज को राष्ट्रीय नीति में तब्दील कर सकें।”
🔹 ‘सरकारी नौकरी’ नहीं, अब ‘उद्योग सृजन’ है राष्ट्र का भविष्य
> “विकसित भारत के लिए अब हमें सरकारी नौकरी की मानसिकता से बाहर आकर उद्योग, उत्पादन, लॉजिस्टिक्स और रोजगार सृजन की सोच अपनानी होगी।”
उन्होंने Ancillary industries, logistics parks, और supply chain ecosystems को नई पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा अवसर बताया।
🏗️ निष्कर्ष: विदर्भ का भविष्य चमकदार
इस कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि महाराष्ट्र में 35% निवेश प्राप्त कर अब विदर्भ और नागपुर तेजी से भारत के औद्योगिक मानचित्र पर उभर रहे हैं।
गडचिरोली जैसी ज़िले, जिन्हें कभी पिछड़ा कहा जाता था, अब नए भारत की प्रगति का केंद्र बनने की राह पर हैं।
> 🔻 “यह विदर्भ के जागने का समय है — अब यह क्षेत्र न केवल सपनों को देखेगा, बल्कि उन्हें साकार भी करेगा।” — अजय संचेती
📌 कार्यक्रम में विदर्भ के दर्जनों उद्योगपति, युवा स्टार्टअप प्रतिनिधि, और नीति विशेषज्ञ उपस्थित थे, जिन्होंने विकास के इस एजेंडा का स्वागत किया।
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