प्रभाग क्रमांक 28 में विकास कार्य : योजनाओं की कमी से बढ़ीं नागरिकों की परेशानियाँ
नागपुर।
प्रभाग क्रमांक 28 में बीते कुछ समय में बड़े पैमाने पर विकास कार्य किए गए हैं। सड़कों का निर्माण, जलापूर्ति, उद्यानों का सौंदर्यीकरण, स्ट्रीट लाइट और सीवरेज व्यवस्था जैसे कार्यों के कारण इलाके का स्वरूप बदला हुआ नजर आता है। लेकिन इन विकास कार्यों को दूरदर्शी और समन्वित योजना का अभाव होने के कारण कई स्थानों पर नागरिकों की रोजमर्रा की समस्याएं कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं।
कागज़ों पर प्रगति दिखाने वाला यह विकास ज़मीनी स्तर पर योजनागत खामियों के चलते आम नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनता जा रहा है। विशेष रूप से सड़कों की ऊंचाई बढ़ाते समय घरों के फर्श स्तर, जलनिकासी व्यवस्था और इलाके की प्राकृतिक ढलान पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते कई क्षेत्रों में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो गई हैं।
ऊंची सड़कें, बरसात में घरों में पानी
प्रभाग के अधिकांश हिस्सों में सीमेंट-कंक्रीट की सड़कें बनाई गई हैं। हालांकि इन सड़कों का निर्माण करते समय घरों के स्तर और ड्रेनेज सिस्टम को नजरअंदाज किया गया। परिणामस्वरूप सड़कें ऊंची और घर अपेक्षाकृत नीचे रह गए हैं। बारिश के मौसम में सड़कों पर जमा पानी सीधे घरों में घुस जाता है। कई इलाकों में आंगन, ओटों और यहां तक कि कमरों में भी पानी भरने की घटनाएं सामने आ रही हैं, जिससे नागरिकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
अधूरे सड़क कार्य, धूल और ट्रैफिक की समस्या
रमणा मारोती मार्ग सहित कई स्थानों पर सड़क निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। इन अधूरे कामों के कारण गड्ढे, धूल-मिट्टी और यातायात की गंभीर समस्या बनी हुई है। विकास कार्यों के दौरान कई जगहों पर सड़कें खोद दी गईं, लेकिन काम पूरा होने के बाद उनकी सही ढंग से मरम्मत नहीं की गई। साकोरे कॉम्प्लेक्स से रिंग रोड तक के मार्गों की दयनीय स्थिति इस अव्यवस्था को साफ तौर पर उजागर करती है।
सीवरेज लाइन टूटी, स्वास्थ्य पर खतरा
कई इलाकों में सीवरेज लाइनें क्षतिग्रस्त हैं। बारिश के दौरान गंदा पानी सड़कों पर बहता नजर आता है। खुले नाले, बदबू, मच्छरों और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। न्यू डायमंड नगर, चिटणीस नगर और पवनशक्ति नगर जैसे क्षेत्रों में कम दबाव से पानी की आपूर्ति हो रही है, जिससे नागरिकों को पीने के पानी के लिए टैंकर या पंपों पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
स्ट्रीट लाइट बंद, उद्यान असुरक्षित
प्रभाग की कई गलियों में स्ट्रीट लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। पुराने खंभे, टूटी तारें और खराब लाइटों के कारण रात के समय भय का माहौल बना रहता है। विशेष रूप से महिलाओं, विद्यार्थियों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है। कुछ उद्यानों का विकास किया गया है, लेकिन देखरेख के अभाव में ग्रीन जिम के उपकरण टूटे और जंग लगे हुए हैं। प्रकाश व्यवस्था न होने से ये उद्यान फिर से असुरक्षित और वीरान होते जा रहे हैं।
सफाई व्यवस्था चरमराई
प्रभाग के कई इलाकों में सफाई कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते, कचरा नियमित रूप से नहीं उठाया जाता और नालियों की सफाई भी नहीं होती। गलियों में प्लास्टिक और सड़ा-गला कचरा जमा दिखाई देता है। बारिश के मौसम को देखते हुए नागरिकों ने विशेष स्वच्छता अभियान और निवारक उपायों की मांग की है।
बाजार क्षेत्रों में अतिक्रमण, ट्रैफिक जाम
खरबी चौक से हसनबाग रोड तक का इलाका व्यापारिक गतिविधियों के कारण दिनभर भीड़भाड़ वाला रहता है। सड़क किनारे खड़ी हाथगाड़ियां, फल-सब्जी ठेले और अवैध अतिक्रमण के कारण सड़कें संकरी हो गई हैं। गलत पार्किंग, धीमी यातायात और पैदल चलने वालों की भीड़ के कारण बार-बार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है। सड़कों पर मौजूद गड्ढों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।
64 हजार से अधिक आबादी वाला प्रभाग
प्रभाग क्रमांक 28 में कुल 64,315 मतदाता हैं, जिनमें 31,930 पुरुष और 32,383 महिला मतदाता शामिल हैं। इतनी बड़ी आबादी के मद्देनज़र यहां की समस्याएं केवल स्थानीय न रहकर पूरे शहर की नागरिक व्यवस्था को प्रभावित कर रही हैं। काटोल रोड, न्यू पंथर नगर, हसनबाग, खरबी, दिघोरी, डायमंड नगर और चिटणीस नगर जैसे क्षेत्रों में आबादी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन बुनियादी सुविधाएं उस अनुपात में विकसित नहीं हो पाई हैं।
उमरेड रोड फ्लाईओवर पर टिकी नजरें
उमरेड रोड पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का काम तेजी से चल रहा है। चढ़ने और उतरने के लिए दो हिस्से बनाए गए हैं और काम अंतिम चरण में बताया जा रहा है। हालांकि यह फ्लाईओवर पूरी तरह कब तैयार होगा और यातायात के लिए कब खोला जाएगा, इसे लेकर नागरिकों में उत्सुकता बनी हुई है। फ्लाईओवर के शुरू होने से ट्रैफिक जाम कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
नागरिकों की मांग : समन्वित और दूरदर्शी योजना
प्रभाग 28 में विकास कार्यों की कमी नहीं है, लेकिन समन्वय की कमी, अधूरी क्रियान्वयन प्रक्रिया और रखरखाव के अभाव में इनका लाभ नागरिकों तक नहीं पहुंच पा रहा है। नागरिकों की मांग है कि नए प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले पुराने कार्यों की समीक्षा की जाए और सड़क स्तर, जलापूर्ति, ड्रेनेज, सफाई और प्रकाश व्यवस्था को एक साथ जोड़कर सुनियोजित विकास किया जाए, ताकि विकास वास्तव में नागरिकों की सुविधा का माध्यम बन सके, न कि परेशानी का।
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