राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में सांस्कृतिक विविधता कार्यशाला का समापन
प्रगतिशील समाज के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक – डॉ. सुधीर जाखेरे (आईपीओएस)
नागपुर, 19 फरवरी 2026:
प्रगतिशील और समावेशी समाज के निर्माण के लिए सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है, ऐसा प्रतिपादन नागपुर डाक विभाग के निदेशक डॉ. सुधीर जाखेरे (आईपीओएस) ने किया। वे राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय सांस्कृतिक विविधता कार्यशाला के समापन समारोह में बुधवार, 18 फरवरी 2026 को गुरुनानक भवन में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
यह कार्यशाला प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम उषा) के अंतर्गत आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) तथा कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न एवं लैंगिक भेदभाव निवारण समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व प्र-कुलगुरु डॉ. राजेंद्र काकड़े ने की। कार्यक्रम में आईक्यूएसी निदेशक डॉ. नंदकिशोर करड़े, रूसा समन्वयक डॉ. रुपेश बडेरे तथा कार्यशाला संयोजक डॉ. शालिनी लिहितकर सहित अनेक गणमान्य उपस्थित थे।
विविधता से संवेदनशीलता और एकता का निर्माण
अपने संबोधन में डॉ. जाखेरे ने कहा कि भारतीय संविधान ने हमें न्याय, स्वतंत्रता, समता, बंधुता और मानवीय गरिमा जैसे उच्च मूल्य प्रदान किए हैं। किंतु ‘बंधुता’ के मूल्य को व्यवहार में उतारना आज भी चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना का उल्लेख करते हुए कहा कि संपूर्ण मानव समाज एक परिवार है और सांस्कृतिक विविधता के माध्यम से संवेदनशीलता विकसित कर ‘एकत्व’ की अवधारणा को साकार किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि देश, समाज, जाति और लिंग जैसी विभिन्न पहचान होने के बावजूद हम सबसे पहले मानव हैं। सामाजिक, सांस्कृतिक और कार्यालयीन स्तर पर विविधता को स्वीकार कर सामूहिक रूप से कार्य करना ही प्रगतिशील समाज की पहचान है।
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. राजेंद्र काकड़े ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से ‘विविधता में एकता’ का उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर आयोजकों की सराहना की। उन्होंने बताया कि डाक विभाग भी विभिन्न भाषाओं और प्रांतों के बीच समन्वय स्थापित कर सांस्कृतिक एकता को सुदृढ़ करने का कार्य करता है।
कार्यशाला की रूपरेखा और महत्व
आईक्यूएसी निदेशक डॉ. नंदकिशोर करड़े ने कार्यशाला की पृष्ठभूमि और तैयारी की जानकारी दी तथा विभिन्न राष्ट्रीय रैंकिंग में ऐसे कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया।
संयोजक डॉ. शालिनी लिहितकर ने तीन दिनों तक आयोजित विविध गतिविधियों की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की।
विजेताओं को पुरस्कार वितरण
समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को प्रमाणपत्र एवं पुरस्कार प्रदान किए गए।
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पोस्टर प्रेजेंटेशन: ओम बांबल (प्रथम), शमी शेख (द्वितीय), हर्षल खैरनार (तृतीय)
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स्वतःस्फूर्त भाषण: दूवा बादशहा (प्रथम), प्रद्युम्न देव (द्वितीय), सृष्टि बोरकर (तृतीय)
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मौखिक प्रस्तुति (स्नातक वर्ग): उमा बल्ला (प्रथम), उदय गुप्ता (द्वितीय), अन्वी अकांत एवं यशस्वी श्रीवास्ती (तृतीय)
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मौखिक प्रस्तुति (स्नातकोत्तर वर्ग): सृष्टि बोरकर (प्रथम), सुचिता धर्माकड़े (द्वितीय), मुसद्दीन अंसारी (तृतीय)
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पीएचडी वर्ग: विठीका गुप्ता एवं अंकिता पांडे सम्मानित
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‘संस्कृति की खोज’ प्रश्नोत्तरी: श्रेतांश सहारे व आदित्य राऊत (प्रथम), रजनी ठाकरे व पुनीत कौर सोहेल (द्वितीय), ओम बांबल व हर्षल खैरनार (तृतीय)
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फूड एंड फेस्टिवल प्रतियोगिता: पल्लवी कटरे (प्रथम), वैष्णवी चव्हाण (द्वितीय), पवनज्योति पाटर (तृतीय), अनुष्का शेंडे व धनश्री मोटघरे (प्रोत्साहन)
कार्यक्रम के सफल आयोजन में अनेक प्राध्यापकों एवं समन्वयकों का विशेष योगदान रहा, जिनका सम्मान भी किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. शिखा गुप्ता ने किया तथा आभार प्रदर्शन डॉ. पायल ठावरे ने किया।
समापन अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में सांस्कृतिक समन्वय और सामाजिक एकता का संदेश प्रभावी रूप से प्रसारित हुआ।