वरिष्ठ नागरिकों के लिए वानाडोंगरी, हिंगणा में भव्य नि:शुल्क चिकित्सा एवं आयुर्वेदिक उपचार शिविर सफलतापूर्वक संपन्न
वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए सामाजिक संगठनों की सराहनीय पहल
नागपुर, 13 जून 2025:
वरिष्ठ नागरिकों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए वानाडोंगरी, हिंगणा में एक व्यापक नि:शुल्क चिकित्सा व आयुर्वेदिक उपचार शिविर का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। इस सराहनीय पहल का आयोजन अमरनगर वरिष्ठ नागरिक मंडल, नागपुर और वरिष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान, नागपुर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
यह शिविर श्री दत्ता मेघे आयुर्वेदिक हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर वानाडोंगरी, हिंगणा रोड पर आयोजित किया गया था, जिसमें नागरिकों को विभिन्न नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं।
शिविर में उपलब्ध सेवाएं:
इस आरोग्य शिविर में 50 से अधिक वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया और उन्हें निम्नलिखित सेवाएं पूर्णतः नि:शुल्क प्रदान की गईं:
रक्त जांच (Blood Test)
ईसीजी (ECG)
आयुर्वेदिक उपचार: पंचकर्म, मसाज, शिरोधारा
व्यक्तिगत स्वास्थ्य परामर्श और मार्गदर्शन
इस शिविर का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को नियमित स्वास्थ्य जांच के लिए प्रेरित करना और आयुर्वेदिक उपचारों के महत्व को रेखांकित करना था।
आयोजन में सहयोग व सहभागिता:
इस आयोजन को सफल बनाने में अमरनगर वरिष्ठ नागरिक मंडल के अध्यक्ष श्री देवीदास आगरकर, सचिव वसंतराव इझनकर एवं वरिष्ठ नागरिक प्रतिष्ठान के सचिव राजू मिश्राजी ने प्रमुख भूमिका निभाई।
इसके साथ ही डॉ. राखी खेडीकर के मार्गदर्शन तथा सामाजिक कार्यकर्ता सर्फराज बोराडे के सक्रिय सहयोग से शिविर का संचालन सुचारु रूप से हुआ।
मंडल के सदस्यों रामदास माहुरे, अशोक सांबारे, तुकाराम शेंडे, विनोद हिरुलकर, मोहन धवल, सौ. शोभाताई आगरकर एवं सौ. शिला इझनकर ने शिविर के प्रबंधन में विशेष मेहनत की।
चिकित्सा सहयोग:
श्री दत्ता मेघे आयुर्वेदिक कॉलेज एवं हॉस्पिटल की ओर से उपप्राचार्य डॉ. मोहन राऊत, डॉ. विघ्नेश पिल्लई, मिलिंद नाचणेकर, अश्विनी झाडे, प्रांजली बर्डे, और पल्लवी अंबाडरे ने भी चिकित्सा जांच और उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
नागरिकों की भागीदारी:
सौ. रासेकर, श्री गणपतराव निंबाळकर, विलास वाकडे, रमेश जिल्हारे, रामकृष्ण बांगडे जैसे कई वरिष्ठ नागरिकों ने शिविर में भाग लेकर स्वास्थ्य परीक्षण करवाया और इस आयोजन की सराहना की।
सामाजिक संदेश:
यह शिविर केवल स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को एक सकारात्मक संदेश भी दिया —
“वरिष्ठों का सम्मान, उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी।”
इस तरह के शिविरों से वरिष्ठ नागरिकों को समय पर रोगों का पता चलता है, उन्हें आवश्यक उपचार मिलते हैं और वे स्वयं को समाज में सम्मानित महसूस करते हैं।
