गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का पुण्यभूमि नागपुर में आगमन — ‘विज्ञान भैरव’ पर विशेष प्रवचन, और मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग अवशेष का प्रथम सार्वजनिक दर्शन

Khozmaster
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गुरुदेव श्री श्री रविशंकर का पुण्यभूमि नागपुर में आगमन — ‘विज्ञान भैरव’ पर विशेष प्रवचन, और मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग अवशेष का प्रथम सार्वजनिक दर्शन

नागपुर, 11 जुलाई 2025 — महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी नागपुर एक बार फिर अध्यात्म के दिव्य आलोक से आलोकित होने जा रही है। विश्वविख्यात आध्यात्मिक सद्गुरु, आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक परम पूज्य श्री श्री रविशंकर जी 10 से 12 सितंबर 2025 के मध्य नागपुर की पुण्यभूमि पर पधारने जा रहे हैं। यह त्रिदिवसीय यात्रा केवल एक आध्यात्मिक उपस्थिति नहीं, बल्कि एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक अवसर बनकर उभर रही है।

इस पावन प्रवास के दौरान गुरुदेव प्राचीनतम तंत्र ग्रंथों में से एक — ‘विज्ञान भैरव’ पर 11 एवं 12 सितंबर को मानकापुर इनडोर स्टेडियम, नागपुर में विशेष प्रवचन देंगे। विज्ञान भैरव वह दिव्य ग्रंथ है जिसमें 112 ध्यान विधियाँ वर्णित हैं — जो सीधे चित्त को शून्यता, शांति और आनंद की ओर ले जाती हैं। यह अवसर साधकों के लिए एक अमूल्य जीवन-transforming अनुभव सिद्ध हो सकता है।

✦ मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग अवशेष का दुर्लभ साक्षात्कार — नागपुरवासियों के लिए पुण्य संयोग

गुरुदेव की यात्रा के पूर्व दिवस 10 सितंबर को राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय (RTMNU) के मैदान में एक अत्यंत दुर्लभ और ऐतिहासिक घटना का आयोजन होने जा रहा है — मूल सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के प्राचीन अवशेष का प्रथम बार सार्वजनिक दर्शन। इतिहास साक्षी है कि यह ज्योतिर्लिंग महमूद ग़ज़नवी के आक्रमण में नष्ट कर दिया गया था और उसके पश्चात यह हजारों वर्षों तक लुप्त रहा। अब यह पवित्र अवशेष पहली बार श्रद्धालुओं के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा — वह भी गुरुदेव के पावन सान्निध्य में।

✦ गुरुपूर्णिमा पर हुआ शुभ संकल्प — नागपुर से जागृत हुआ वैश्विक आध्यात्मिक भाव

इस ऐतिहासिक आयोजन की घोषणा स्वयं गुरुदेव ने गुरुपूर्णिमा के शुभ दिवस पर की, जब हजारों नागपुरवासियों ने प्रेम, श्रद्धा और कृतज्ञता से ओतप्रोत होकर उनके चरणों में नमन अर्पित किया। इस अवसर पर गुरुदेव ने अपने संदेश में कहा:

> “आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत कृतज्ञता से होती है। कृतज्ञता ही जीवन का रस है। जब यह समझ आती है कि हम कुछ लेने नहीं, बल्कि कुछ देने के लिए इस धरती पर आए हैं — वही सच्ची विनम्रता का आरंभ होता है। और फिर यह भी बोध होता है कि हमारे पास न कुछ देने को है, न कुछ लेकर जाने को — बस प्रेम, सेवा और समर्पण ही शेष रहता है।”

गुरुपूर्णिमा का यह आयोजन केवल भारत तक सीमित नहीं रहा। बून, नॉर्थ कैरोलिना (अमेरिका) स्थित गुरुदेव के आश्रम से इस कार्यक्रम का विश्वव्यापी सीधा प्रसारण किया गया, जिसमें अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, एशिया और अमेरिका के हजारों केंद्रों पर लाखों साधकों ने सामूहिक ध्यान और शांति के इस प्रवाह में सहभाग लिया।

यह आयोजन न केवल नागपुर के इतिहास में, बल्कि भारत के आध्यात्मिक पुनर्जागरण की यात्रा में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित होने जा रहा है।

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