डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विधि महाविद्यालय के छात्रों ने किया NEERI, पारिवारिक न्यायालय और उपभोक्ता न्यायालय का शैक्षणिक भ्रमण
विधिक शिक्षा के साथ व्यावहारिक अनुभव का संयोजन, छात्रों को मिली न्यायिक प्रक्रियाओं की प्रत्यक्ष समझ
नागपुर, 18 जुलाई 2025 — डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर विधि महाविद्यालय (BASL), नागपुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने 17 और 18 जुलाई को एक महत्त्वपूर्ण शैक्षणिक पहल के तहत राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI), पारिवारिक न्यायालय और उपभोक्ता न्यायालय का दौरा किया। इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को कक्षा की सीमाओं से बाहर निकालकर वास्तविक न्यायिक और संस्थागत परिवेश से जोड़ना था, जिससे उन्हें विधिक शिक्षा का व्यवहारिक पक्ष समझने का अवसर मिल सके।
NEERI में पर्यावरण कानून का व्यावहारिक प्रशिक्षण
17 जुलाई को, पर्यावरण विधि के पाठ्यक्रम के अंतर्गत छात्रों ने NEERI का शैक्षणिक भ्रमण किया, जहां उन्हें पर्यावरणीय शोध, प्रदूषण नियंत्रण की तकनीकों, तथा पर्यावरण संरक्षण हेतु भारत में लागू कानूनी व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। यह दौरा अधिवक्ता दीप्ति घोगले के समन्वय में आयोजित किया गया तथा इसका शैक्षणिक मार्गदर्शन डॉ. अधरा देशपांडे और महाविद्यालय के निदेशक डॉ. रविशंकर मोर ने प्रदान किया।
पारिवारिक और उपभोक्ता न्यायालय में न्यायिक प्रक्रियाओं का सजीव अनुभव
इसी दौरान, LLB (3 वर्षीय) के तीसरे सेमेस्टर तथा BA LLB (5 वर्षीय) पाठ्यक्रम के सातवें सेमेस्टर के छात्रों ने पारिवारिक न्यायालय और उपभोक्ता न्यायालय का भ्रमण किया।
पारिवारिक न्यायालय में छात्रों ने न्यायिक कार्यवाही को प्रत्यक्ष रूप से देखा और वैकल्पिक विवाद निपटान प्रणाली (ADR) पर विशेषज्ञ व्याख्यान में भाग लिया। उन्होंने काउंसलरों से परामर्श प्रक्रियाओं की गहन जानकारी प्राप्त की और “वर्ल्ड जस्टिस डे” के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) द्वारा आयोजित विशेष कार्यक्रम में भी सहभागिता की।
इसके पश्चात उपभोक्ता न्यायालय में छात्रों ने उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत आने वाले वास्तविक मामलों की सुनवाई देखी और उपभोक्ता न्याय प्रणाली की संरचना व कार्यप्रणाली को समझा।
इस पूरे कार्यक्रम का सुव्यवस्थित समन्वय अधिवक्ता रमन चिमुरकर और अधिवक्ता साक्षी पाटिल द्वारा किया गया। शैक्षणिक निर्देशन की भूमिका में डॉ. अधरा देशपांडे और डॉ. रविशंकर मोर उपस्थित रहे।
BASL की अनुभवात्मक शिक्षा की प्रतिबद्धता
इस पहल ने यह सिद्ध किया कि BASL न केवल सैद्धांतिक ज्ञान प्रदान करने में अग्रणी है, बल्कि छात्रों को व्यावसायिक दुनिया के लिए भी प्रभावी रूप से तैयार कर रहा है। निदेशक डॉ. रविशंकर मोर ने छात्रों की सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा:
> “न्यायालयों और शोध संस्थानों के प्रत्यक्ष अनुभव के माध्यम से अनुभवात्मक शिक्षा भावी विधिवेत्ताओं के निर्माण में अत्यंत आवश्यक है। हमारा प्रयास है कि छात्र केवल कानून की भाषा नहीं, बल्कि उसकी आत्मा को भी समझें।”
डॉ. मोर ने NEERI, पारिवारिक न्यायालय, उपभोक्ता न्यायालय, DLSA तथा इस पहल में योगदान देने वाले समस्त शिक्षकों और समन्वयकों का हृदय से आभार प्रकट किया।

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