“महापुरुषों की प्रेरणा से विद्यार्थी बनाएं उज्ज्वल भविष्य, राष्ट्र निर्माण में निभाएं अग्रणी भूमिका” — आयकर आयुक्त संदीप साळुंखे
नागपुर |
टिळक विद्यालय, नागपुर में एक अत्यंत प्रेरणादायक और सांस्कृतिक वातावरण में लोकमान्य बाल गंगाधर टिळक पुण्यतिथि तथा लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे जयंती का संयुक्त आयोजन भव्य रूप से संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत सरकार द्वारा “उत्कृष्ट आयुक्त” का सम्मान प्राप्त आयकर आयुक्त मा. संदीप कुमार साळुंखे उपस्थित रहे। उनके साथ बैंक ऑफ इंडिया के विभागीय प्रबंधक श्री जयनारायण विशिष्ट अतिथि के रूप में मंच पर विराजमान थे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्था के समर्पित सदस्य योगेश्वर बुटी ने की। विद्यालय के प्राथमिक और माध्यमिक विभाग की प्रधानाध्यापिकाएं, सौ. कुरळकर व सौ. कुंभारे, कार्यक्रम के मंच पर उपस्थित थीं।
इस अवसर पर श्री साळुंखे का संस्था की ओर से विशेष सत्कार शाल और श्रीफल प्रदान कर किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने विद्यार्थियों को राष्ट्रपुरुषों के आदर्शों से प्रेरणा लेकर जीवन में दृढ़ निश्चय और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा—
“टिळक और अण्णाभाऊ जैसे महापुरुषों का जीवन केवल इतिहास नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए प्रकाशपुंज है। विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने भीतर नेतृत्व, सेवा और संकल्प की भावना विकसित करें। परीक्षा की सफलता से आगे बढ़कर समाज और देश के लिए कुछ कर दिखाने का संकल्प लें।”
इस भावपूर्ण मंच पर साळुंखे ने लोकमान्य टिळक पर आधारित एक शानदार पोवाडा भी आत्मीयता से प्रस्तुत किया, जिसने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।

श्री जयनारायण ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि दृष्टिकोण में परिवर्तन ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने कहा—
“यदि आप आत्मविश्वास से भरकर अपने सपनों को साकार करने की ठान लें, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं है। केवल पढ़ाई के लिए नहीं, जीवन के लिए सीखिए।”
इस गरिमामय अवसर पर विद्यालय के गुणवंत विद्यार्थियों का विशेष सत्कार भी किया गया। श्री साळुंखे ने व्यक्तिगत रूप से कुछ विद्यार्थियों को नकद पुरस्कार भी प्रदान किए, जिससे उनका उत्साह द्विगुणित हुआ।
कार्यक्रम में माध्यमिक विभाग के विद्यार्थियों ने सौ. भुते के मार्गदर्शन में टिळकजी के जीवन संघर्ष और विचारों पर आधारित जाज्वल्य पोवाडा सादर किया, जिसने दर्शकों के मन पर अमिट छाप छोड़ी।
कार्यक्रम का सुगठित संचालन सौ. अभ्यंकर एवं सौ. तेलपांडे ने किया। समापन पर सौ. कुरळकर और सौ. कुंभारे ने सभी अतिथियों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया।
यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के मन में राष्ट्रनिर्माण की नई चेतना जागृत करने वाला प्रेरणास्रोत बन गया। महापुरुषों के विचारों से ओतप्रोत यह आयोजन सभी के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव साबित हुआ।

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