“जिसे तुम्हारा दुख समझ आता है, उसी का हाथ पकड़कर चलो” – नारायण बागडे का समाज को आत्मचिंतन करने का आवाहन
नागपुर, 2 अगस्त 2025 – “जो लोग केवल सुख में जीते हैं, उन्हें आपके दुख और भावनाओं से कोई मतलब नहीं होता। ऐसे लोग बस अवसर की तलाश में रहते हैं। इसलिए उनके पीछे भागने के बजाय, जिनके दिल में आपके दर्द के लिए जगह है, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलें,” यह मार्मिक संदेश आंबेडकरी रिपब्लिकन मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नारायण बागडे ने दिया।
वे नागपुर में लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित बौद्ध-मातंग एकता मिलन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस प्रेरणादायी कार्यक्रम में सामाजिक एकजुटता, समता और सम्मान की भावना को बल देेने वाले विविध उपक्रम आयोजित किए गए।
कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने वाले अतिथि:
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अध्यक्षता: वीणा इंगोले
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विशेष अतिथि: नामदेवराव निकोसे (पूर्व पुरातत्व अधिकारी), अॅड. मिलिंद खोब्रागडे, रवी वाघमारे (पूर्व बैंक अधिकारी), धर्मा बागडे, आदिवासी नेता मारोतराव कोडवते, पूर्व नगरसेविका अश्विनी जिचकार और युवा मातंग नेता विनायक इंगोले
कार्यक्रम का आयोजन मनोहरराव इंगोले, सचिन इंगोले, सुभाष मेश्राम और श्रीकांत भावे द्वारा किया गया।
सांस्कृतिक श्रद्धांजलि और सत्कार:
कार्यक्रम की शुरुआत वीणा इंगोले द्वारा अण्णा भाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पण से हुई। सूरज ढोणे ने दीप प्रज्वलन किया। सीता वानखेडे ने तथागत गौतम बुद्ध और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर समाज के मेधावी छात्रों, कला एवं संगीत क्षेत्र के प्रतिनिधियों, और गर्भवती एवं नवप्रसूता महिलाओं का ससम्मान सत्कार किया गया। यह सम्मान मुख्य अतिथि नारायण बागडे के हाथों प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. रमेश दुपारे ने प्रभावशाली ढंग से किया, जबकि आभार प्रदर्शन मारोतराव कोडवते ने किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिनका योगदान रहा:
शालिक बांगर, रमेश डहका, अशुंल वानखेडे, गणेश पाट, शिंगारे, अतुल इंगोले, मधुकर इंगोले, पुष्पा इंगोले, बेबी बाई इंगोले, बाबुजी सोनटक्के, और नारायण कांबळे ने अथक परिश्रम किए। कार्यक्रम की जानकारी पुण्यशील बोदिले द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी गई।
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