कुल जमा तीन दर्जन मकान 

Khozmaster
1 Min Read

कुल जमा तीन दर्जन मकान 

बीच मेँ एक सड़क, 

डेढ़ दर्जन मकान 

सड़क के इस ओर 

डेढ़ दर्जन मकान 

सड़क के उस ओर, 

सड़क पक्की होती गई 

मकानों के सुख-दुख बंटते रहे, 

इस ओर के मकानों के सुख-दुख 

उस ओर के मकानों के नहीं, 

उस ओर के मकानों के सुख-दुख 

इस ओर के मकानों के नहीं, 

पक्की सड़क बीच मेँ है, 

अब किसी की संवेदनाएं, भावनाएं 

सड़क को पार नहीं करतीं, 

इस या उस ओर नहीं आतीं-जातीं 

इसलिये इस ओर वालों के सुख दुख 

उस ओर वालों के नहीं,

उस ओर वालों के सुख दुख 

इस ओर वालों के नहीं, 

एक पक्की सड़क ने 

पक्का बंटवारा कर दिया

इन सबके सुख और दुख का, 

वे जानते, समझते हैं एक दूसरे को 

परंतु सुख-दुख मेँ साझेदारी नहीं करते, 

बस, अपना घर है सब कुछ 

ना गली, ना मोहल्ला  

ना शहर ना कोई देश 

अपने घर मेँ सुख

पूरा देश सुखी, 

अपने घर मेँ दुख 

पूरा देश दुखी, 

मेरा घर ही मेरा देश है 

नए दौर का यही संदेश है।

[गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर]

0 9 4 2 4 4
Users Today : 1
Share This Article
Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *