डमी स्कूलों का खेल खत्म! CBSE की सख्ती के बाद अब बिना नियमित उपस्थिति वाले छात्र 12वीं बोर्ड में नहीं बैठ पाएंगे — नागपुर में भी कोचिंग क्लास का बड़ा खुलासा, प्रशासन बना मूकदर्शक

KHOZ MASTER
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डमी स्कूलों का खेल खत्म! CBSE की सख्ती के बाद अब बिना नियमित उपस्थिति वाले छात्र 12वीं बोर्ड में नहीं बैठ पाएंगे — नागपुर में भी कोचिंग क्लास का बड़ा खुलासा, प्रशासन बना मूकदर्शक

नई दिल्ली/नागपुर।

अब ‘डमी स्कूल’ के जरिए 12वीं की बोर्ड परीक्षा में बैठना इतना आसान नहीं होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने इस फर्जीवाड़े पर शिकंजा कस दिया है। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि जिन छात्रों की स्कूल में नियमित उपस्थिति नहीं होगी, उनका एडमिट कार्ड जारी नहीं किया जाएगा और वे परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे।

CBSE के इस फैसले से उन छात्रों और कोचिंग माफियाओं को बड़ा झटका लगा है, जो अब तक केवल डमी नामांकन के जरिए बोर्ड परीक्षा पास करने का रास्ता अपनाते थे।

क्या है डमी स्कूल का खेल?

डमी स्कूल यानी ऐसा स्कूल जहाँ छात्र नाम मात्र का दाखिला लेते हैं। न पढ़ाई, न उपस्थिति — पूरा साल कोचिंग क्लास में JEE, NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।

मोटी फीस लेकर स्कूल सिर्फ औपचारिकता निभाता है, साल के अंत में परीक्षा का फार्म भरवा देता है। यही नहीं, कई कोचिंग संस्थानों के साथ स्कूलों की मिलीभगत से ये धंधा खूब फलफूल रहा था।

CBSE का स्पष्ट आदेश

अब CBSE ने सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि छात्रों की उपस्थिति रिपोर्ट पोर्टल पर नियमित रूप से अपलोड की जाए। जिनकी उपस्थिति तय मानकों से कम होगी, उन्हें परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा।

साथ ही, यदि किसी स्कूल में बड़ी संख्या में डमी प्रवेश पाए गए तो उस स्कूल पर भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा मंत्रालय का रुख

हाल ही में लोकसभा में भी इस मुद्दे पर सवाल उठा था। शिक्षा मंत्रालय ने कहा — ऐसी प्रवृत्तियाँ शिक्षा के बुनियादी उद्देश्यों के विरुद्ध हैं। शिक्षा सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तित्व विकास और नैतिक शिक्षा के लिए भी होती है।

नागपुर में बड़ा खुलासा — प्रशासन क्यों सो रहा है?

CBSE के इस कदम के बाद जब देशभर में डमी स्कूलों पर शिकंजा कसा जा रहा है, उसी बीच नागपुर में एक बड़ा खुलासा हुआ।

नागपुर के एक स्थानीय न्यूज़ चैनल ने स्टिंग ऑपरेशन कर यह साबित कर दिया कि यहाँ भी कुछ नामचीन कोचिंग संस्थान डमी स्कूल के नाम पर मोटी फीस वसूल रहे हैं।

छात्रों को स्कूल न भेजकर पूरे साल कोचिंग करवाई जा रही है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल — शिक्षण अधिकारी इस पर चुप क्यों हैं? प्रशासन आँखें मूँद कर क्यों बैठा है?

नागपुर में कई कोचिंग संस्थानों में ऐसे हालात हैं, फिर भी प्रशासन ‘कुंभकर्णीय नींद’ में सोया है। CBSE की सख्ती का असर यहाँ कब दिखाई देगा? यह देखना बाकी है।

CBSE के इस फैसले से पूरे देश में डमी स्कूल माफिया पर नकेल कसेगी।

छात्र स्कूल में जाकर पढ़ाई के लिए बाध्य होंगे, जिससे शिक्षा का स्तर सुधरेगा। साथ ही, कोचिंग संस्थानों और डमी स्कूलों के बीच चल रहे इस ‘सिस्टम’ पर भी विराम लगेगा।

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