नागपुर में “वन हेल्थ दृष्टिकोण” पर द्वितीय राष्ट्रीय पशुवैद्यकीय, मत्स्य व दुग्ध संगोष्ठी 2026 का आयोजन 11-12 अप्रैल को
नागपुर, 10 अप्रैल 2026:
नागपुर स्थित Maharashtra Animal and Fisheries Sciences University के अंतर्गत Nagpur Veterinary College परिसर में 11 और 12 अप्रैल 2026 को “द्वितीय राष्ट्रीय पशुवैद्यकीय, मत्स्य व दुग्ध संगोष्ठी 2026” का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संगोष्ठी का मुख्य विषय “समाकलित वन हेल्थ दृष्टिकोण: ग्रामीण सशक्तिकरण के लिए पशुवैद्यकीय, दुग्ध व मत्स्य क्षेत्रों की मजबूती” रखा गया है।
यह संगोष्ठी Veterinary Council of India, विद्यानिधि नागपुर और एग्रीविजन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम में देशभर से लगभग 400 प्रतिभागियों के शामिल होने की संभावना है, जिनमें वैज्ञानिक, प्रोफेसर, नीति-निर्माता, उद्योग विशेषज्ञ, पशु चिकित्सक, डेयरी व मत्स्य क्षेत्र के पेशेवर, उद्यमी, शोधकर्ता और विद्यार्थी शामिल होंगे।
भारत जैसे कृषि प्रधान देश में पशुधन, दुग्ध और मत्स्य क्षेत्र ग्रामीण आजीविका, पोषण सुरक्षा और आर्थिक विकास के प्रमुख स्तंभ हैं। हालांकि, इन क्षेत्रों को ज़ूनोटिक बीमारियों का खतरा, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरणीय क्षति और सतत उत्पादन प्रणाली की आवश्यकता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में “वन हेल्थ” दृष्टिकोण, जो मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को एक साथ जोड़ता है, एक प्रभावी समाधान के रूप में उभर रहा है।
कार्यक्रम की रूपरेखा:
संगोष्ठी के पहले दिन (11 अप्रैल) उद्घाटन सत्र आयोजित होगा, जिसमें डॉ. राघवेंद्र भट्ट मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस अवसर पर डॉ. नितीन पाटील, डॉ. उमेश शर्मा, डॉ. नवीना महेश्वरप्पा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे। इसके बाद तकनीकी सत्र, पैनल चर्चा और “विकसित भारत” विषय पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे।
दूसरे दिन (12 अप्रैल) “रोल मॉडल सत्र” का आयोजन होगा, जिसमें सफल उद्यमी युवाओं को प्रेरित करेंगे। इसके साथ ही लघु पशुपालन, ग्रामीण विकास और वन हेल्थ के तहत सामुदायिक स्वास्थ्य पर चर्चा होगी। प्रतिभागियों के बीच नेटवर्किंग और भविष्य की रणनीति के लिए जोनल बैठकें भी आयोजित की जाएंगी।
मुख्य विषय:
संगोष्ठी में पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, ज़ूनोटिक रोग नियंत्रण, कुक्कुट पालन, जैव सुरक्षा, डेयरी उत्पादन व गुणवत्ता, मत्स्य पालन, जलकृषि, प्राकृतिक खेती और डिजिटल तकनीक की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
एग्रीविजन के राष्ट्रीय संयोजक मनीष फाटे ने पत्रकार परिषद में जानकारी देते हुए बताया कि यह संगोष्ठी कृषि व संबंधित क्षेत्रों में नवाचार, नीति निर्माण और सहयोग को नई दिशा देगी। इस अवसर पर डॉ. शिरीष उपाध्ये, शिवम पांडेय और कु. वैष्णवी पांडेय सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
महत्त्व:
यह संगोष्ठी न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, रोजगार सृजन और मजबूत ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आयोजकों ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह आयोजन बहुविषयक सहयोग को बढ़ावा देगा और भारत को “विकसित भारत” के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ाने में सहायक सिद्ध होगा।
