शिक्षा के लिए चल रही भोजन योजना में घोटाला: ‘भीम आर्मी’ ने ब्रिस्क इंडिया कंपनी पर लगाए गंभीर आरोप, मंत्री और अधिकारियों की मिलीभगत का भी आरोप
विदर्भ | 28 जून 2025
अनुसूचित जाति के छात्रों को सरकारी छात्रावासों में मिलने वाले भोजन में भारी अनियमितता, जाली दस्तावेजों का उपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप ‘भीम आर्मी भारत एकता मिशन’ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए हैं। उन्होंने समाज कल्याण विभाग और ब्रिस्क इंडिया प्रा. लि. कंपनी पर जमकर निशाना साधा। इस मामले में सहायक आयुक्त, प्रादेशिक उपायुक्त से लेकर मंत्री स्तर तक की “सैटिंग” होने का भी आरोप लगाया गया है।
शासन की केंद्रीय रसोई नीति ने छीना स्थानीय लोगों का रोजगार
पहले समाज कल्याण विभाग के छात्रावासों में भोजन सेवा स्थानीय महिला बचत समूहों और संघटन द्वारा दी जाती थी। लेकिन 16 नवंबर 2023 को शासन ने “सेंट्रलाइज्ड किचन” नीति घोषित कर दी और विदर्भ क्षेत्र की भोजन आपूर्ति का ठेका मुंबई स्थित कंपनियों को दे दिया गया।
ब्रिस्क इंडिया प्रा. लि. कंपनी को विदर्भ के 11 जिलों का ठेका दिया गया।लेकिन इसने फर्जी दस्तावेज देकर अनुचित तरीके से निविदा हासिल की और फिर अवैध रूप से सब-कॉन्ट्रैक्टिंग (पेटी ठेका) कर दिया।
पेटी ठेका — भ्रष्टाचार की जड़
शासन दर के अनुसार, प्रति छात्र ₹5300 भोजन पर खर्च होता है।
लेकिन ब्रिस्क इंडिया उपठेकेदारों को केवल ₹3900 देती है।
बाकी ₹1400 की राशि बिचौलियों और कंपनी के पास चली जाती है।
इसके कारण उपठेकेदारों को घाटा और छात्रों को घटिया भोजन मिलता है।
उपठेकेदारों के पास आवश्यक दस्तावेज नहीं होते: फूड लाइसेंस, मेडिकल प्रमाण पत्र, जीएसटी रजिस्ट्रेशन, अनुभव, रजिस्ट्रेशन नंबर आदि।
छात्रों का स्वास्थ्य खतरे में: 6 महीने से नहीं मिला दूध, भोजन निम्न स्तर का
पिछले 6 महीनों से कई छात्रावासों में छात्रों को दूध नहीं दिया गया।
भोजन में पोषक तत्वों की कमी, स्वच्छता का अभाव और मात्रा भी कम।
राजनगर छात्रावास में एक महीने तक भोजन बंद रहा — फिर भी कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
भोजन तैयार करने में कोई आहार विशेषज्ञ नहीं है और प्रबंधन समितियाँ निष्क्रिय हैं।
अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप — खुलेआम 6% कमीशन की बात
भीम आर्मी के प्रशांत बन्सोड ने कहा कि ब्रिस्क इंडिया के प्रतिनिधि प्रदीप बधे और प्रवीण प्रभुणे ने खुद कहा:
> “ऊपर तक सब सेटिंग है, सभी अधिकारियों को 6% कमीशन जाता है। इसलिए कोई भी कार्रवाई नहीं होती।”
इससे स्पष्ट है कि सहायक आयुक्त, प्रादेशिक उपायुक्त तक भ्रष्टाचार की जद में हैं।
जुर्माना भी सिर्फ उपठेकेदारों को — मुख्य कंपनी को संरक्षण
घटिया भोजन देने पर विभाग ने ₹1 लाख का जुर्माना ठोका।
लेकिन ये ब्रिस्क कंपनी पर नहीं, बल्कि उपठेकेदारों से वसूला गया।
यह सरकार की नीति के खिलाफ है और ब्रिस्क को बचाने वाला कदम है।
स्थानीय रोजगार गया — महिला बचत समूह बाहर कर दिए गए
नई नीति से हजारों महिला बचत समूहों और अनुसूचित जाति की संस्थाओं का रोजगार छीन लिया गया।
गरीब महिलाओं की जीविका खत्म कर दी गई।
गांव स्तर की संस्थाओं की जगह, केवल मुंबई की कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया।
भीम आर्मी की प्रमुख मांगें:
1. ब्रिस्क इंडिया सहित सभी कंपनियों के ठेके तत्काल रद्द किए जाएं।
2. पेटी ठेकेदारी पर तुरंत रोक लगाई जाए।
3. विदर्भ की भोजन आपूर्ति का ठेका स्थानीय अनुसूचित जाति की महिला समूहों को दिया जाए।
4. ब्रिस्क और उसके दलालों पर एट्रोसिटी एक्ट व धोखाधड़ी कानून के तहत अपराध दर्ज किया जाए।
5. पिछले 6 महीनों से लंबित भुगतान उपठेकेदारों को तुरंत किया जाए।
6. वर्ष 2025-26 के लिए नई निविदा प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
7. वर्षाराणी खरमाटे प्रकरण में एफआईआर दर्ज कर छात्रों के अधिकार बहाल किए जाएं।
8. फर्जी दस्तावेज देकर ठेका पाने वाली कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया जाए।
9. मंत्रियों और अधिकारियों तक जांच शुरू कर दोषियों पर कार्रवाई की जाए।
“यदि मांगें नहीं मानी गईं तो सड़क पर उतरेंगे” — भीम आर्मी का अल्टीमेटम
अंकित राउत (जिला अध्यक्ष )प्रशांत बन्सोड (महाराष्ट्र उपाध्यक्ष), अंकित राऊत, पंकज जसूतकर, नेहा राऊत, आकाश गजभिये, वसंत पाटिल आदि ने कहा:
“यदि सरकार ने तुरंत कार्रवाई नहीं की, तो भीम आर्मी के कार्यकर्ता छात्रों को न्याय दिलाने के लिए तीव्र आंदोलन करेंगे। भ्रष्टाचार और सामाजिक अन्याय को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”

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