“मातृत्व जब माटी से मिलता है, तब सृजन होता है” कांचनताई गडकरी को ‘प्रयोगशील कृषि पुरस्कार 2025’ | पुरस्कार राशि धापेवाडा के विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर को समर्पित

Khozmaster
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🌿 “मातृत्व जब माटी से मिलता है, तब सृजन होता है”

कांचनताई गडकरी को ‘प्रयोगशील कृषि पुरस्कार 2025’ | पुरस्कार राशि धापेवाडा के विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर को समर्पित

 

नागपुर | 1 जुलाई 2025

जब एक स्त्री अपनी हथेलियों से मिट्टी को स्पर्श करती है, तो वह केवल अन्न नहीं उपजाती—वह संस्कृति बोती है, संस्कार सींचती है, और पीढ़ियों को पोषित करती है।

इसी दिव्य विचारधारा की साक्षात प्रतिमा बनीं सौ. कांचनताई गडकरी, जिन्हें मंगलवार को ‘प्रयोगशील कृषि पुरस्कार 2025’ से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान वसंतराव नाईक प्रतिष्ठान एवं वनराई फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक भावपूर्ण समारोह में प्रदान किया गया, जिसमें ₹30,000 की पुरस्कार राशि, शाल, श्रीफल और स्मृति-चिन्ह समर्पित किया गया।

भावना से ओतप्रोत इस क्षण को और भी विशिष्ट बनाते हुए कांचनताईं ने घोषणा की कि यह संपूर्ण राशि वे धापेवाडा स्थित विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर को अर्पित करेंगी।

 

🌾 एक स्त्री, एक खेत – और एक क्रांति

अपने संबोधन में कांचनताईं ने बड़े ही सौम्य स्वर में कहा:

> “मां ने मुझे खेती का संस्कार दिया, ससुराल ने साथ और संबल दिया, और नितीनजी गडकरी ने दिशा और दृष्टि दी। इन तीन स्तंभों के सहारे मैंने धापेवाडा की माटी को प्रयोगों की प्रयोगशाला बना दिया।”

वह आगे बोलीं —

> “मैंने यह पुरस्कार इसलिए स्वीकार किया कि मेरे जैसे अन्य किसान भी जागें, प्रयोग करें, और विषमुक्त जीवनशैली को अपनाएं। परसबाग से प्रारंभ होने वाला यह परिवर्तन पूरे परिवार की सेहत, चेतना और चरित्र को गढ़ सकता है।”

🎓 विज्ञान और संवेदना का संगम

सम्मान प्रदान करते हुए वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सी. डी. मायी ने कहा:

> “कांचनताईं जैसी सृजनशील महिलाओं को सम्मानित कर हम केवल एक व्यक्ति को नहीं, एक विचारधारा को पूजते हैं। उनके कार्यों से देशभर के किसान प्रेरणा लें — यही इस पुरस्कार की सार्थकता है।”

डॉ. शरदराव गडाख, कुलपति, डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषि विद्यापीठ, ने कहा:

> “गडकरी जी की छवि भले ही आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी हो, लेकिन उनके हृदय की धरती पर हमेशा खेती ही लहलहाई है। कांचनताईं उसी धरती की फसल हैं – प्रयोगशील, धैर्यशील और दिव्य।”

डॉ. गिरीश गांधी, अध्यक्ष, वनराई फाउंडेशन, ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा:

> “विदर्भ की इस पुत्री ने सिद्ध किया है कि मिट्टी और मातृत्व जब एकत्र होते हैं, तब वहां न केवल अन्न, बल्कि आशा, आत्मनिर्भरता और अध्यात्म भी पनपता है।”

अॅड. निलय नाईक ने भावभीना प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए कहा:

> “कांचनताई और नितीनजी गडकरी — इस युगल ने वसंतराव नाईक के स्वप्न को साकार किया है। यह केवल खेती नहीं, यह कर्तव्य और करुणा का समर्पण है।”

🌼 आंगन में फूटे हरियाली – यही है आधुनिक भारत की पुकार

कार्यक्रम का संयोजन उत्कृष्ट रूप से प्रगती पाटील ने किया, और आभार प्रदर्शन बाळ कुलकर्णी ने।

इस शुभ अवसर पर कांचनताईं की माता, पुत्रवधुएं, बेटी के साथ-साथ अनिरुद्ध पाटील, डॉ. सुजाता नाईक, चेतना कांबले, और अनेकों विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे।

✨ “मातृत्व और माटी के बीच जब संकल्प की वाणी गूंजती है, तब सृजन की नयी गाथा लिखी जाती है” – सौ. कांचनताईं गडकरी

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