अब नहीं चलेगी बिना लाइसेंस सूदखोरी – किसानों और आम लोगों से लूट करने वालों पर सरकार का बड़ा डंडा!
नया कड़ा कानून लागू – अवैध सूदखोरी पकड़ी गई तो सीधे पांच साल की जेल और 50 हजार तक का जुर्माना
🔷 खोजमास्टर न्यूज नेटवर्क | नागपुर
राज्य सरकार ने किसानों और आम जनता को अवैध सूदखोरों के चंगुल से मुक्त करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। महाराष्ट्र में अब महाराष्ट्र सावकारी (विनियमन) संशोधित अध्यादेश 2024 लागू हो गया है। इसके तहत अब गले में फंदा डालकर ब्याज के नाम पर लूट मचाने वालों की खैर नहीं।
अब कोई भी बिना लाइसेंस के कर्ज बांटता या मनमाना ब्याज वसूलता पकड़ा गया तो उसे पांच साल तक की जेल या 50 हजार रुपये तक का जुर्माना झेलना पड़ेगा।
🔷 ब्याज के नाम पर दुगनी लूट नागपुर जिले में अवैध सूदखोर महीना-पानी की तरह ब्याज पी जाते हैं। महीने में 5% यानी साल भर में 60% तक ब्याज वसूला जाता है। दो साल में कर्ज की रकम दोगुनी हो जाती है। राजनीतिक छत्रछाया के कारण कई सूदखोर खुलेआम नियम तोड़ते हैं और गरीब किसान या जरूरतमंद कुछ कर भी नहीं पाते।
🔷 सूचना बोर्ड जरूरी – पर जमीनी हकीकत शून्य , कानून कहता है – हर लाइसेंसधारी सूदखोर को अपने दफ्तर में बड़ा सूचना फलक लगाना होगा, जिसमें ब्याज दर और कर्ज की पूरी जानकारी साफ-साफ लिखी हो। मगर कागजों पर लिखा यह नियम ज़मीन पर गायब है। सहकारिता विभाग भी कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति करता है।
🔷 बीज-बुआई में सबसे बड़ा फंदा खेती के सीजन में किसानों को बीज, खाद, दवाइयों के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है। मजबूरी में किसान सूदखोरों के पास पहुंचते हैं। कई जगह तो जमीन गिरवी रखवाकर कर्ज दिया जाता है – जो पूरी तरह अवैध है। लेकिन शिकायतें न के बराबर होती हैं।
🔷 छह महीने में सिर्फ चार पर कार्रवाई! नागपुर जिले में करीब हजार से ज्यादा सूदखोर हैं, लेकिन बीते छह महीनों में महज चार पर ही कार्रवाई हो पाई है। नियमों के मुताबिक कोई भी सूदखोर चक्रवृद्धि ब्याज नहीं ले सकता और न ही मूलधन से ज्यादा ब्याज वसूल सकता है।
🔷 कर्जदारों के लिए खास सलाह अगर कोई सूदखोर तय सीमा से ज्यादा ब्याज वसूल रहा है या धमकी दे रहा है तो डरें नहीं – तुरंत पुलिस या सहकारिता विभाग में शिकायत करें। नियमों के तहत ही ब्याज लिया जा सकता है, मनमानी बिल्कुल नहीं।
➡️ नया अध्यादेश किसानों और जरूरतमंदों के लिए राहत की सांस है। लेकिन कानून का असर तभी होगा, जब सहकारिता विभाग कागजों से बाहर आकर जमीनी कार्रवाई करेगा। वरना किसानों के गले में सूदखोरों का फंदा ऐसे ही कसता रहेगा, ऐसा किसानों का साफ कहना है।
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