मानव-वन्यजीव संघर्ष पर लगेगा विराम – कृत्रिम बुद्धिमत्ता से वनों के प्रहरी बनेगा हर गाँव
पालक मंत्री बावनकुले की घोषणा : विदर्भ के व्याघ्र प्रकल्पों से सटे गाँवों में लगेंगे 3,150 कैमरे और सायरन
नागपुर | 12 जुलाई –
विदर्भ के वन क्षेत्रों में बाघों की बढ़ती हलचल, ग्रामीणों पर हो रहे जानलेवा हमले और उससे हो रही मासूम नागरिकों की मृत्यु ने एक गंभीर संकट का रूप ले लिया है। इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने हेतु महाराष्ट्र सरकार ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है।
राज्य के राजस्व मंत्री व नागपुर के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने आज नागपुर में घोषणा की कि अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से व्याघ्र प्रकल्पों के आसपास के गाँवों में बाघों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाएगी।
‘मार्वल’ कंपनी से ऐतिहासिक करार – बाघ की आहट पर बजेगा सायरन, गाँव को मिलेगा त्वरित अलर्ट
राज्य सरकार ने उच्च तकनीक से युक्त ‘मार्वल’ (MARVEL) कंपनी के साथ एक विशेष सामंजस्य करार (MoU) किया है। इसके तहत नागपुर वन क्षेत्र, पेंच, ताडोबा-अंधारी और नवेगांव-नागझिरा व्याघ्र प्रकल्पों से सटे गाँवों में कुल 3,150 कैमरे और सायरन यंत्र लगाए जाएंगे।
ये उन्नत कैमरे बाघ और तेंदुए की अलग-अलग पहचान करने में सक्षम होंगे। जैसे ही कोई वन्य प्राणी गाँव की सीमा में प्रवेश करेगा, कैमरे से जुड़े सायरन तत्काल बजेंगे और ग्रामीणों को सतर्क कर देंगे।
कैमरों और सायरन की योजना इस प्रकार होगी –
▪️ पेंच व्याघ्र प्रकल्प – 875 कैमरे
▪️ ताडोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प – 525 कैमरे
▪️ नवेगांव-नागझिरा प्रकल्प – 600 कैमरे
▪️ नागपुर वन क्षेत्र – 1,145 कैमरे
इन सभी कैमरों को गाँवों के सीमावर्ती क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा और दर्जनों ग्रामों की घनी बस्तियों में सायरन सिस्टम स्थापित कर वायरलेस तकनीक से जोड़ा जाएगा, जिससे किसी भी खतरे की स्थिति में तत्काल अलर्ट जारी किया जा सके।
मुख्यमंत्री की दूरदृष्टि से साकार हुआ ‘मार्वल’ – अब ग्रामीण सुरक्षा के लिए करेगा कार्य
इस पूरे प्रकल्प की संकल्पना राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दूरदृष्टि से जन्मी है। उनके नेतृत्व में स्थापित ‘मार्वल’ कंपनी अब तक राज्य में अपराध, दुर्घटनाओं और आपात स्थितियों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग से कई सफलता प्राप्त कर चुकी है।
आज नागपुर में संपन्न इस करार पर मार्वल के CEO डॉ. हर्ष पोद्दार और व्याघ्र प्रकल्प अधिकारियों ने पालक मंत्री बावनकुले और वित्त राज्यमंत्री आशिष जायसवाल की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।
पालक मंत्री का स्पष्ट निर्देश – कार्य में लाएं तेजी, ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोपरि
विगत कई बैठकों में बाघों के हमलों को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर चुके पालक मंत्री बावनकुले और वित्त राज्यमंत्री जायसवाल ने आज इस करार को मूर्तरूप देकर संबंधित विभागों को शीघ्रतापूर्वक कार्य आरंभ करने के निर्देश दिए।
उनका स्पष्ट कहना था – “यह तकनीक केवल निगरानी के लिए नहीं, बल्कि ग्रामवासियों की जान बचाने का एक सशक्त माध्यम बननी चाहिए।”
वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति – परियोजना को मिल रही मजबूत प्रशासनिक संरचना
इस अवसर पर उपस्थित प्रमुख अधिकारी –
▪️ प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्रीनिवास राव
▪️ मुख्य वन संरक्षक व क्षेत्र संचालक डॉ. किशोर मांगर
▪️ क्षेत्र संचालक डॉ. प्रभुनाथ शुक्ल
▪️ आर. जयराम गौड़ा
▪️ उपवन संरक्षक विनीत व्यास
▪️ उपसंचालक अक्षय गजभिये
▪️ सहायक वन संरक्षक पूजा लिम्बगांवकर
सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
यह केवल तकनीकी परियोजना नहीं – बल्कि ग्रामीणों के जीवन की सुरक्षा का एक नया युग
इस परियोजना के माध्यम से न केवल ग्रामवासियों की जान बचेगी, बल्कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के इतिहास में एक नया अध्याय शुरू होगा।
यह विज्ञान, संवेदनशीलता और सुशासन का त्रिवेणी संगम है, जो महाराष्ट्र को एक नई दिशा की ओर ले जा रहा है।
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