दिव्यांग बच्चों की आवाज बने संदीप जोशी — मासूमों के हक़ के लिए उठाई आवाज, विधानसभा में प्रशासन को दी इंसानियत की सीख

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दिव्यांग बच्चों की आवाज बने संदीप जोशी — मासूमों के हक़ के लिए उठाई आवाज, विधानसभा में प्रशासन को दी इंसानियत की सीख

मुंबई | विशेष संवाददाता

जब बात कमजोरों और मासूम दिव्यांग बच्चों की हो, तब नागपुर के आमदार संदीप जोशी कभी पीछे नहीं हटते — यह उन्होंने एक बार फिर साबित कर दिया है। पावसाळी अधिवेशन में उन्होंने दिव्यांग बच्चों और उनके शिक्षकों पर हो रहे अन्याय के खिलाफ ऐसा मुद्दा उठाया कि पूरा सदन भावुक हो उठा। उनकी दबंग आवाज ने न सिर्फ प्रशासन को झकझोरा, बल्कि संवेदनशीलता भूल चुके दिव्यांग आयुक्त प्रविण पुरी को सीधे विधानसभा से निलंबित करवा दिया।

नागपुर के गुलशननगर में दि मातोश्री शोभाताई भाकरे मन्दबुद्धि विद्यालय में पढ़ने वाले दिव्यांग बच्चे और वहां काम करने वाले शिक्षक-पदाधिकारी महीनों से अपमान और शोषण झेल रहे थे। संस्था संचालक कर्ज चुकाने के नाम पर कर्मचारियों से जबरन हर महीने पैसे वसूल रहे थे। इतना ही नहीं, विरोध करने वालों को बंदूक दिखाकर धमकाया जाता था। गरीब घरों से आने वाले ये शिक्षक और कर्मचारी खुद पर हो रहे अत्याचार को सहते रहे, क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं इन बच्चों का भविष्य अंधेरे में न चला जाए।

जब इन मासूमों और कर्मचारियों की कोई सुनवाई नहीं हुई, तब उनकी उम्मीद बने आमदार संदीप जोशी। उन्होंने दिव्यांग आयुक्त प्रविण पुरी को कई बार फोन किया — छह बार कॉल किया गया, लेकिन इंसानियत को शर्मसार करने वाले अफसर ने फोन उठाना भी जरूरी नहीं समझा।

पर संदीप जोशी भी कहां रुकने वाले थे। उन्होंने इस दर्दनाक मुद्दे को पूरे विधानसभा के सामने रखा। उन्होंने कहा, “ये सिर्फ कर्मचारी नहीं, ये दिव्यांग बच्चों के अभिभावक जैसे हैं। अगर इनके साथ अन्याय होगा तो उन मासूम बच्चों का क्या होगा, जिनकी आवाज कोई नहीं सुनता? अगर एक आमदार की भी बात नहीं सुनी जाएगी तो एक सामान्य कर्मचारी या गरीब शिक्षक की कौन सुनवाई करेगा?

जोशी की सच्ची और बुलंद आवाज ने पूरा सदन हिला दिया। भाजपा गटनेते प्रविण दरेकर भी खड़े हुए और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने दिव्यांगों के लिए जो विभाग बनाया है, उसकी मर्यादा को ऐसे अफसर रौंद नहीं सकते। उन्होंने आयुक्त के तत्काल निलंबन की मांग की।

सभा अध्यक्ष राम शिंदे ने भी आमदार जोशी की बात का पूरा मान रखते हुए दिव्यांग आयुक्त को उसी वक्त अनिवार्य अवकाश पर भेजने और शासन स्तर से निलंबन की कार्रवाई के आदेश दिए। मंत्री अतुल सावे ने भी भरोसा दिलाया कि जोशी की आवाज को न्याय मिलेगा और दोषी अफसर पर कार्रवाई होगी।

इस फैसले से दिव्यांग बच्चों और कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है। आज हर कोई कह रहा है कि संदीप जोशी सिर्फ नागपुर के आमदार नहीं हैं, बल्कि वे उन मासूम दिव्यांग बच्चों के संरक्षक हैं जिनकी आवाज अक्सर दबा दी जाती है।

जोशी ने यह भी साबित कर दिया कि जब तक ऐसे जनप्रतिनिधि हैं, कोई भी अधिकारी जनता की अवहेलना करके नहीं बच सकता। उनकी सच्ची लड़ाई ने मासूम बच्चों के लिए न्याय का रास्ता खोला है।

आज नागपुर में लोग कह रहे हैं — संदीप जोशी हैं तो उम्मीद है! दिव्यांग बच्चों का हक़ कोई अब छीन नहीं सकता।

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