नागपुर में लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर भव्य श्रद्धांजलि समारोह संपन्न
गजघाटे : “अण्णाभाऊ साठे ने साहित्य के माध्यम से समाज के शोषित वर्ग को आवाज़ दी”
नागपुर, 1 अगस्त 2025 :
नागपुर शहर में आज लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे की 103वीं जयंती के अवसर पर एक भव्य और भावनात्मक वातावरण में श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति की ओर से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के अनेक समाजसेवक, साहित्यप्रेमी, आंबेडकरवादी कार्यकर्त्ता तथा युवा वर्ग ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
समारोह की शुरुआत अण्णाभाऊ साठे के पुतले पर माल्यार्पण करके की गई। इस अवसर पर समिति के वरिष्ठ सदस्य विलास गजघाटे ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा, “लोकशाहीर अण्णाभाऊ साठे ना केवल एक महान लेखक थे, बल्कि वे समाज परिवर्तन के वाहक भी थे। उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से उस वर्ग को आवाज़ दी जिसे सदियों से दबाया और कुचला गया था। उनके साहित्य में विद्रोह है, करुणा है, और परिवर्तन की तीव्र चाह है।”
गजघाटे ने आगे कहा कि अण्णाभाऊ साठे ने समाज के पीड़ित, श्रमिक, खेत-मजदूर और दलित वर्ग की व्यथा को अपने साहित्य में इस प्रकार प्रस्तुत किया कि वह जनसाहित्य बन गया। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह सिध्द किया कि साहित्य केवल बौद्धिक वर्ग के लिए नहीं, बल्कि जन-जन की आवाज़ बनने के लिए होना चाहिए।
कार्यक्रम में उपस्थित अन्य मान्यवरों में शरद मेश्राम, नरेश गायकवाड, देवाजी रंगारी, सुदेश लोखंडे तथा मधुकर मेश्राम शामिल थे। सभी वक्ताओं ने अण्णाभाऊ साठे के जीवन, संघर्ष और साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डाला और उन्हें युगपुरुष बताया। वक्ताओं ने कहा कि आज जब समाज में भेदभाव और अन्याय की नई चुनौतियाँ खड़ी हो रही हैं, तब अण्णाभाऊ साठे के विचार और उनका साहित्य नई पीढ़ी को दिशा देने में सक्षम है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में सहभाग लिया . अण्णाभाऊ साठे की कविताओं और गीतों का सामूहिक सादरीकरण हुआ, जिससे वातावरण देशभक्ति और सामाजिक समरसता से भर गया। ‘जय भीम’, ‘अण्णाभाऊ साठे अमर रहें’ के नारों से समारोह स्थल गूंज उठा।
इस आयोजन का उद्देश्य केवल श्रद्धांजलि अर्पित करना ही नहीं था, बल्कि अण्णाभाऊ साठे के विचारों और संघर्षों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी था। वक्ताओं ने आग्रह किया कि शैक्षणिक संस्थानों में अण्णाभाऊ साठे के साहित्य को पढ़ाया जाए और उन पर शोधकार्य किए जाएं, जिससे उनका जीवनकार्य अधिक लोगों तक पहुंचे।
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थितों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि अण्णाभाऊ साठे के विचारों को गांव-गांव, गली-गली तक ले जाया जाएगा और सामाजिक न्याय की मशाल को बुझने नहीं दिया जाएगा।
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