“सेवा, संघर्ष और सज़ा: कांग्रेस में नरेंद्र जिचकार को नजरअंदाज़ करने की असली वजह क्या है?”

Khozmaster
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नरेंद्र जिचकार के साथ अन्याय क्यों? कांग्रेस में गुटबाजी, दोहरे मापदंड और गॉडफादर संस्कृति पर गंभीर सवाल


नागपुर, 2 अगस्त 2025:
पश्चिम नागपुर से कांग्रेस के कर्मठ, ऊर्जावान और लोकप्रिय युवा नेता नरेंद्र जिचकार को लेकर कांग्रेस संगठन की कार्यशैली पर एक बार फिर तीखे सवाल उठ खड़े हुए हैं। विधानसभा चुनाव से पहले ही पार्टी से निलंबित किए गए नरेंद्र जिचकार को अब तक पार्टी में पुनः शामिल नहीं किया गया, जबकि उन्हीं चुनावों में खुलेआम पार्टी विरोध करने वाले नेताओं को न केवल माफ किया गया, बल्कि उन्हें बड़े-बड़े पद भी दे दिए गए हैं।

यह घटनाक्रम कांग्रेस के भीतर गहराते असंतोष, गुटबाजी और पक्षपातपूर्ण राजनीति की ओर इशारा करता है।


जमीनी नेता को सज़ा, बागियों को इनाम!

नरेंद्र जिचकार को उस वक्त निलंबित कर दिया गया, जब वह न तो चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके थे और न ही किसी प्रकार की बगावत की थी। बल्कि, वे उस समय स्वयं पार्टी से जुड़े कार्यक्रमों में व्यस्त थे और वर्तमान विधायक गुट के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए हमलों का शिकार बने थे।

वहीं दूसरी ओर, चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ खुलेआम प्रचार करने वाले राजेंद्र मुळक, याज्ञवल्क्य जिचकार और रमेश पुणेकर को कांग्रेस ने माफ कर, हाल ही में घोषित प्रदेश कार्यकारिणी में वरिष्ठ उपाध्यक्ष, महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पदों से नवाजा।

इस पक्षपातपूर्ण फैसले से कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और वे एक ही सवाल पूछ रहे हैं:
“अगर बगावत करने वालों को माफ किया जा सकता है, तो नरेंद्र जिचकार को न्याय क्यों नहीं?”


जमीनी कार्यकर्ता, जनसेवा में अग्रणी

नरेंद्र जिचकार सिर्फ एक राजनीतिक चेहरा नहीं, बल्कि एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी पहचाने जाते हैं।

उन्होंने समय-समय पर निःशुल्क स्वास्थ्य जांच शिविर, रोज़गार सहायता कैम्प, और जन आधार यात्रा जैसे कई जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का आयोजन किया है, जिन्हें जनता से बेहतरीन प्रतिसाद मिला।

जन आधार यात्रा विशेष रूप से पश्चिम नागपुर में चर्चित रही, जिसमें हजारों लोगों ने हिस्सा लिया और जिचकार को सीधे सुनने व अपनी समस्याएँ बताने का मौका मिला।

उनकी इसी सक्रियता और जनसंपर्क ने उन्हें जनता का नेता बना दिया — और शायद यही बात कुछ लोगों को असहज कर रही थी।


लोकप्रियता से डरे ‘अपने ही’ लोग?

पश्चिम नागपुर में नरेंद्र जिचकार का जनाधार लगातार बढ़ रहा था। पार्टी के अंदर ही कई कार्यकर्ताओं का मानना है कि उनकी लोकप्रियता को देखते हुए ही उन्हें योजनाबद्ध तरीके से निशाना बनाया गया।

“वर्तमान विधायक को नरेंद्र जिचकार की बढ़ती लोकप्रियता से खतरा महसूस हो रहा था,” एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया।

यह भी उल्लेखनीय है कि वर्तमान विधायक का न केवल संगठन के कार्यकर्ताओं से मनमुटाव है, बल्कि वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं व पूर्व मंत्रियों से भी असहज रिश्ते रखते हैं। इसके उलट, नरेंद्र जिचकार का स्वभाव सभी से मेलजोल और सहयोग का रहा है — यही वजह है कि वे हर वर्ग में लोकप्रिय हैं।


गॉडफादर कल्चर के खिलाफ कार्यकर्ताओं का विद्रोह

हाल ही में घोषित कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी में ऐसे कई चेहरे हैं जो पिछले 4–5 सालों से ही राजनीति में हैं, फिर भी उन्हें सीधे महासचिव और अन्य बड़े पद दे दिए गए।

वहीं, नरेंद्र जिचकार जैसे 15–20 साल से पार्टी के लिए ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे नेताओं को लगातार दरकिनार किया जा रहा है।
यह सब “गॉडफादर संस्कृति” और पसंदीदा चेहरों को बढ़ावा देने वाली प्रवृत्ति को उजागर करता है।


प्रदेशाध्यक्ष की भूमिका पर भी उठे प्रश्न

नव नियुक्त प्रदेशाध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाळ, जो राहुल गांधी की “मोहब्बत की दुकान” के विचार को आगे बढ़ाने की बात करते हैं, अब खुद सवालों के घेरे में हैं।

“अगर तीन बागी नेताओं को माफ कर सम्मानित किया जा सकता है, तो नरेंद्र जिचकार को बार-बार नज़रअंदाज़ क्यों किया जा रहा है?” — यही सवाल अब जमीनी कार्यकर्ताओं और जिचकार समर्थकों के मन में गूंज रहा है।


एक ही मांग: न्याय हो, पक्षपात नहीं

जिचकार समर्थकों और वफादार कांग्रेस कार्यकर्ताओं की एक ही मांग है –
“सभी के लिए समान नियम और पारदर्शी प्रक्रिया लागू की जाए।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर कांग्रेस ने नरेंद्र जिचकार जैसे कर्मठ नेता की उपेक्षा जारी रखी, तो न केवल संगठन कमजोर होगा, बल्कि आगामी चुनावों में पार्टी को पश्चिम नागपुर जैसे क्षेत्रों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।


कांग्रेस को करना होगा आत्ममंथन

यदि कांग्रेस सच में “प्यार की राजनीति” और न्याय की विचारधारा पर चलना चाहती है, तो उसे सबसे पहले अपने संगठन के अंदर गुटबाजी, भेदभाव, और राजनीतिक षड्यंत्रों को खत्म करना होगा।

नरेंद्र जिचकार जैसे युवा, कर्मठ और लोकप्रिय नेता को न्याय देना न केवल पार्टी के भीतर पारदर्शिता का प्रतीक होगा, बल्कि यह संगठन को जमीनी स्तर पर मज़बूती देने का भी सशक्त कदम साबित होगा।

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1 Comment
  • Narendra jichkar is ground label worker on present situation he is good & aapriciate work on health education recruitment of jobs helping hands needs congress of on nagpur narendra jichkar.

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