कुणबी समाज का अपमान सहन नहीं किया जाएगा! सुशिलाबाई मोराळे के विवादित बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया — कुणबी पंचायत का कड़ा विरोध, माफी न मांगी तो राज्यव्यापी आंदोलन का अल्टीमेटम!

Khozmaster
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कुणबी समाज का अपमान सहन नहीं किया जाएगा! सुशिलाबाई मोराळे के विवादित बयान पर तीव्र प्रतिक्रिया — कुणबी पंचायत का कड़ा विरोध, माफी न मांगी तो राज्यव्यापी आंदोलन का अल्टीमेटम!

नागपुर | विशेष प्रतिनिधि

ठाणे में वंजारी समाज द्वारा आयोजित एक सार्वजनिक सभा के दौरान दिए गए अपमानजनक और आपत्तिजनक बयान के चलते सुशिलाबाई मोराळे अब गहरे विवादों में घिरती नजर आ रही हैं। मोराळे ने अपने भाषण में कहा था कि “कुणबी समाज ओबीसी सूची में जबरन घुस गया और आज तक उनका एक भी कलेक्टर नहीं हुआ”, इस बयान ने पूरे कुणबी समाज में आक्रोश की लहर पैदा कर दी है।

कुणबी पंचायत का एकमत से विरोध — सार्वजनिक माफी मांगो, नहीं तो तीव्र जनआंदोलन होगा!

नागपुर के उदयनगर स्थित कुणबी पंचायत कार्यालय में आयोजित आपात बैठक में मोराळे के बयान की कड़ी निंदा की गई और यह मांग की गई कि वे तुरंत सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। अन्यथा, समाज की प्रतिष्ठा और आत्मसम्मान के सवाल पर राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ने की चेतावनी पंचायत की ओर से दी गई।

बैठक में वक्ताओं ने कहा कि, “अपने समाज की महिमा गाते हुए किसी दूसरे समाज का अपमान करना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि यह जानबूझकर सामाजिक तनाव फैलाने का प्रयास है।”

इतिहास और तथ्यों का सामना करें: कुणबी समाज के पास है ठोस डाटा — मोराळे ने जनता को गुमराह किया!

कुणबी समाज ने केवल आरक्षण के आधार पर नहीं, बल्कि अपने परिश्रम, काबिलियत और संघर्ष के बल पर शिक्षा और प्रशासनिक सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हैं —

  • डॉ. पंजाबराव देशमुख, देश के पहले कृषि मंत्री एवं संविधान सभा के सदस्य,

  • डॉ. श्रीकांत जिचकार, सबसे अधिक शैक्षणिक डिग्रियां प्राप्त करने वाले राजनेता, जो IAS और IPS दोनों परीक्षाएं पास कर चुके थे,

  • तथा रविंद्र ठाकरे, जो नागपुर के जिलाधिकारी रह चुके हैं।

कुणबी पंचायत ने स्पष्ट किया कि मोराळे का बयान पूरी तरह तथ्यहीन है और समाज को बदनाम करने की कोशिश है। “आप वंजारी समाज का डाटा लेकर आइए, हम कुणबी समाज का डाटा लेकर आते हैं — जनता के सामने सच्चाई रखी जाएगी,” ऐसा खुले शब्दों में मोराळे को चुनौती दी गई।

ओबीसी सूची में ऐतिहासिक स्थान स्पष्ट — जबरन नहीं, योगदान के आधार पर हुई थी मान्यता!

1928 में ‘स्टार्ट कमेटी’ और बाद में 1942 में ‘इंटरमिजिएट कम्युनिटी’ के रूप में कुणबी समाज का समावेश हुआ था। 1967 के शासन निर्णय में कुणबी समाज 83वें क्रमांक पर और वंजारी समाज 167वें क्रमांक पर दर्ज हुआ था। मंडल आयोग की सूची में भी कुणबी समाज 143वें स्थान पर और वंजारी समाज 261वें स्थान पर था।
इसका स्पष्ट अर्थ यह है कि कुणबी समाज वंजारी समाज से पहले ओबीसी में शामिल हुआ था, जबरदस्ती से नहीं घुसाया गया।

सामाजिक सौहार्द पर खतरा — मोराळे पर भाषण पर रोक लगाने की मांग

कुणबी पंचायत ने कहा कि ऐसे भड़काऊ और समाज को बांटने वाले वक्तव्यों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और वक्तव्य देने वाले लोगों पर सार्वजनिक भाषण देने पर प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि समाज में वैमनस्य और तनाव को रोका जा सके।

इस बैठक में प्रमुख रूप से एड. अशोक यावले, कृष्णकांत मोहोड, प्रो. दिवाकर मोहोड, डॉ. अरुण वऱ्हाडे, अजय लांबट, आशिष दोनाडकर, प्रज्वल लुटे, हरिभाऊ चौधरी, अनिल पाटणकर सहित कई गणमान्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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