‘ममता-HIMC’ की ओर से डागा अस्पताल में विश्व स्तनपान सप्ताह पर समर्पित और प्रभावशाली मार्गदर्शन अभियान की भव्य सफलता
दिनांक: 2 अगस्त 2025, नागपुर – 1 से 7 अगस्त तक मनाए जाने वाले विश्व स्तनपान सप्ताह के पावन अवसर पर, ममता हेल्थ इंस्टिट्यूट फॉर मदर एंड चाइल्ड (MAMTA-HIMC) ने डागा अस्पताल के प्रसूति वार्ड में “जागृति-4” परियोजना के तहत नवजात माताओं के लिए एक अत्यंत सफल और व्यावहारिक मार्गदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस पहल ने माताओं और उनके परिवारों में स्तनपान के प्रति जागरूकता और आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया।
यह कार्यक्रम नवजात माताओं को स्तनपान की वैज्ञानिक विधि, बच्चे को सही ढंग से स्तन से जोड़ने, दूध उत्पादन बढ़ाने, और स्तनपान से जुड़ी आम चुनौतियों के समाधान पर व्यक्तिगत और प्रायोगिक रूप से मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया था। ममता-HIMC के अनुभवी स्तनपान सलाहकारों एवं स्वास्थ्य शिक्षकों ने प्रत्येक माँ से संवाद कर उनके सवालों का उत्तर दिया, उनकी परेशानियों को समझा और उनकी आवश्यकताओं के अनुसार समाधान प्रस्तुत किए।

परिवार के अन्य सदस्यों, खासकर पिता और बुजुर्गों को भी इस अभियान में शामिल कर नवजात माताओं के लिए एक समर्पित और सहायक परिवेश का निर्माण किया गया, जिससे माताएं मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत हुईं। इस संवादात्मक और संवेदनशील पद्धति ने माताओं के आत्मविश्वास को बढ़ाया और स्तनपान के सफल अभ्यास को सुनिश्चित किया, जो नवजात शिशुओं के जीवन और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

डागा अस्पताल के प्रशासन ने इस पहल की गहन प्रशंसा की। कार्यक्रम में उपस्थित चिकित्सा अधिकारी डॉ. माडवी एवं ए.एन.एम. कल्पना रोडे ने ममता-HIMC के समर्पित कर्मियों के अथक प्रयासों और प्रभावशाली कार्य की हार्दिक सराहना की। इस अभियान में ममता-HIMC के योगेश राठौड़ और कु. मंजूषा नासरे ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से विशिष्ट योगदान दिया, जिनका कुशल नेतृत्व श्रीमती पल्लवी भंडारकर के मार्गदर्शन में हुआ।

यह कार्यक्रम न केवल नवजात शिशुओं की सुरक्षा, उनके बेहतर स्वास्थ्य और विकास के लिए बल्कि माताओं के सशक्तिकरण एवं समुदाय में स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है। ममता-HIMC का उद्देश्य विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान ऐसे प्रभावी और सतत कार्यक्रमों के माध्यम से स्तनपान को बढ़ावा देना, बाल मृत्यु दर को कम करना और दीर्घकालीन स्वास्थ्य लाभ सुनिश्चित करना है, जिससे एक स्वस्थ और खुशहाल समाज का निर्माण हो सके।
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