नागपुर: ट्रैफिक पुलिस की टोइंग वैन में कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल!

Khozmaster
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नागपुर: ट्रैफिक पुलिस की टोइंग वैन में कर्मचारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल!

प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर के भरोसे चल रही व्यवस्था – बिना सुरक्षा उपकरणों के ड्यूटी, चलती वैन में खड़े रहना बन सकता है जानलेवा

📍 नागपुर, 3 अगस्त 2025:
नियम तोड़ने वाले वाहनों को हटाने के लिए शहर में ट्रैफिक पुलिस की टोइंग वैन लगातार सक्रिय है। लेकिन इन वैन में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर लापरवाही उजागर हो रही है। बिना सुरक्षा उपकरणों के, असुरक्षित हालात में काम करने वाले इन कर्मचारियों की जान हर दिन खतरे में रहती है।


🚨 प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर के भरोसे पूरी व्यवस्था, मगर कोई जवाबदेही नहीं!

ट्रैफिक पुलिस ने टोइंग वैन का संचालन एक प्राइवेट ठेकेदार को सौंप रखा है। कर्मचारी भी इसी कॉन्ट्रैक्टर द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। लेकिन कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर न ठेकेदार गंभीर है और न प्रशासन।


🛑 न बैठने की सुविधा, न हेलमेट – चलती वैन में खड़े रहना पड़ता है

  • वैन में कर्मचारियों के लिए कोई सुरक्षित बैठने की जगह नहीं

  • कई बार चलती वैन में खड़े रहना पड़ता है – जो बेहद खतरनाक है

  • टो की गई टू-व्हीलर्स पर बैठकर सफर करने को मजबूर

  • न हेलमेट, न रिफ्लेक्टिव जैकेट, न फर्स्ट एड किट


⚠️ ब्रेक लगने पर गिरने का खतरा – कर्मचारी चलती वैन में संतुलन खो सकते हैं

“हम कई बार चलती वैन में खड़े रहते हैं क्योंकि बैठने की कोई जगह नहीं होती। अगर अचानक जोर से ब्रेक लग जाए तो संतुलन बिगड़ जाता है। कई बार हम गिरने से बचे हैं – लेकिन कब तक?”
— एक कर्मचारी (नाम न छापने की शर्त पर)

यह स्थिति किसी बड़े हादसे को दावत देने जैसी है।


🗣️ कर्मचारियों की पीड़ा – “हमें इंसान नहीं समझा जाता”

“हम नियम लागू कराने का काम करते हैं, लेकिन खुद के लिए कोई नियम नहीं। अगर हमें कुछ हो जाए, तो पूछने वाला कोई नहीं होता।”
— कर्मचारी


📢 सामाजिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया – “यह जानलेवा लापरवाही है”

सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि –

“जब प्रशासन ने प्राइवेट कॉन्ट्रैक्टर को जिम्मेदारी सौंपी है, तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। ये कर्मचारी सड़क पर जान हथेली पर लेकर काम कर रहे हैं, यह एक तरह की शोषण व्यवस्था है।”


प्रमुख मांगें जो अब अनदेखी नहीं की जा सकतीं:

🔹 हर टोइंग वैन में सुरक्षित बैठने की व्यवस्था अनिवार्य हो
🔹 सभी कर्मचारियों को हेलमेट, जैकेट और फर्स्ट एड किट दी जाए
🔹 चलती वैन में खड़े रहने पर रोक लगे, कर्मचारियों के लिए सुरक्षित स्पेस हो
🔹 सभी कर्मचारियों का बीमा और सुरक्षा प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए
🔹 ठेकेदार की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्यवाही की जाए


प्रशासन कब जागेगा?

अब तक न ट्रैफिक विभाग और न ठेकेदार की तरफ से कोई ठोस प्रतिक्रिया आई है।
विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है –

“यदि यही हालात रहे, तो एक गंभीर हादसा होकर रहेगा – और तब यह चुप्पी नहीं चलेगी।”

 

🔴 सवाल यह है कि क्या कर्मचारियों की सुरक्षा को गंभीरता से लिया जाएगा, या फिर कोई बड़ी दुर्घटना होने के बाद ही नींद खुलेगी?

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