कर्मचारियों की अनदेखी, श्रम कानूनों की खुलेआम अवहेलना — कंत्राटी कामगारों ने सहसचिव आयशा पठाण को सौंपा निवेदन
नागपुर : वर्षों से नियमित कर्मियों की तरह काम करने के बावजूद बुनियादी अधिकारों से वंचित कंत्राटी कामगारों ने अब अपने हक के लिए आवाज उठाई है। सोमवार को इन कामगारों की ओर से सहसचिव आयशा पठाण को एक विस्तृत निवेदन सौंपा गया, जिसमें श्रम कानूनों की धज्जियाँ उड़ाने और कामगारों के साथ हो रहे अन्याय की गंभीर शिकायतें दर्ज की गईं।
कामगारों का कहना है कि पिछले 12 से 15 वर्षों से वे नियमित कर्मचारियों की तरह सभी जिम्मेदारियाँ निभा रहे हैं, लेकिन उन्हें अब तक न तो उचित सुरक्षा उपकरण, न पहचान पत्र (ID), और न ही स्वास्थ्य बीमा (ESIC/Mediclaim) जैसी मूलभूत सुविधाएं मिली हैं।
निवेदन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे:
1. स्वास्थ्य सेवाओं की घोर अनदेखी: ESIC और मेडिक्लेम जैसी सुविधाएं नदारद हैं, जिससे बीमार पड़ने पर कामगारों को निजी खर्चे पर इलाज कराना पड़ता है।
2. जान को खतरे में डालकर काम: कंत्राटी कामगारों से चालू लाइन में काम करवाया जाता है, पर उनके साथ कोई अनुभवी नियमित कर्मचारी नहीं रहता। इससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
3. सुरक्षा और पहचान का संकट: आज तक कई कामगारों को सुरक्षा उपकरण और पहचान पत्र नहीं मिले हैं।
4. ठेका अवधि और वेतन का अन्याय: नॉन-टेक्निकल कर्मचारियों के तीन महीने के ठेके को 11 महीने का किया जाए। इसके अलावा बार-बार दस्तावेज़ों की मांग की जाती है और वेतन समय पर नहीं मिलता। वेतन हर माह की 7 तारीख तक दिए जाने की माँग की गई है।
5. अनुभवी लोगों को प्राथमिकता: 2019 के बाद बने सब-स्टेशनों में फ्रेशर कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जबकि अनुभवी कर्मचारियों को हटाया गया। ऐसे कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए।
संघटना के नेताओं ने यह भी बताया कि प्रशिक्षण के दौरान सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देश दिए जाते हैं, पर जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं होता, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ गई है।
श्रम कानूनों का खुला उल्लंघन हो रहा है — यह स्थिति न केवल अमानवीय है, बल्कि देश के कानूनों के भी खिलाफ है। कामगारों ने प्रशासन से अपील की है कि इन मुद्दों का तत्काल समाधान किया जाए, अन्यथा आंदोलन की राह अपनाने के लिए वे मजबूर होंगे।
इस अवसर पर संघटना के ज़ोन अध्यक्ष समीर हांडे, सचिव अभिजीत माहुलकर, कोषाध्यक्ष योगेश सायवानकर, कार्याध्यक्ष सागर साबळे, संघटन मंत्री सुकेश गुरवे और सदस्य गोलू पुडके सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
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