कबीर मठ में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का तीसरा दिन पटना,
कबीरपंथी मठ फतुहां में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ पर कथाव्यास सुश्री राधाकिशोरी जी का स्वागत अभिनंदन एवं व्यासपूजन मठ के संरक्षक महन्थ ब्रजेश मुनि, वरिष्ठ पत्रकार अरुण कुमार पांडे, न्यास समिति के सदस्य विवेक मुनि, श्रीमती शारदा देवी, भाजपा नेत्री शोभा देवी, कटेया स्थान के महंत रामसुंदर शरण महाराज ने किया।
कथा प्रसंग का वर्णन करते हुए राधाकिशोरी जी ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि आप जहाँ जा रहे है वहाँ आपका, अपने इष्ट या अपने गुरु का अपमान नहीं हो।
यदि ऐसा होने की आशंका हो तो उस स्थान पर जाना नहीं चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों हो। कथा के दौरान सती चरित्र के प्रसंग को सुनाते हुए भगवान शिव की बात को नहीं मानने पर पिता के घर जाने पर अपमानित होने के कारण स्वयं को अग्नि में स्वाहा कर देना पड़ा।
कथा में उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा को सुनाते उन्होंने कहा कि ध्रुव की सौतेली मां सुरुचि के द्वारा अपमानित होने पर भी उसकी मां सुनीति ने धैर्य नहीं खोया जिससे एक बहुत बड़ा संकट टल गया। परिवार को बचाए रखने के लिए धैर्य संयम की नितांत आवश्यकता रहती है। भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा को सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। कथा के दौरान उन्होंने बताया कि पाप के बाद कोई व्यक्ति नरकगामी हो, इसके लिए श्रीमद् भागवत में श्रेष्ठ उपाय प्रायश्चित बताया है। अजामिल उपाख्यान के माध्यम से इस बात को विस्तार से समझाया गया साथ ही प्रह्लाद चरित्र के बारे में विस्तार से सुनाया और बताया कि भगवान नृसिंह रुप में लोहे के खंभे को फाड़कर प्रगट होना बताता है कि प्रह्लाद को विश्वास था कि मेरे भगवान इस लोहे के खंभे में भी है और उस विश्वास को पूर्ण करने के लिए भगवान उसी में से प्रकट हुए एवं हिरण्यकश्यप का वध कर प्रह्लाद के प्राणों की रक्षा की। कथा के दौरान भजन मंडली ने भजनों की प्रस्तुति से भक्ति भाव का संचार किया।
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