लोकतंत्र की लड़ाई का नया चेहरा: कुनाल राऊत के नेतृत्व में “बैलेट पेपर लाओ” आंदोलन ने पकड़ी रफ्तार
नागपुर, 13 जुलाई 2025
जब देश में ईवीएम को लेकर संदेह बढ़ रहा है और जनता की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग जोर पकड़ रही है, तब नागपुर से एक युवा नेतृत्व सामने आया है — कुनाल राऊत, जो अब “बैलेट पेपर लाओ, लोकतंत्र बचाओ” आंदोलन का चेहरा बन गए हैं।
कुनाल राऊत के नेतृत्व में नागपुर में एक क्रियाशील समिति का गठन किया गया है, जिसका उद्देश्य है — भारत में चुनावों को फिर से बैलेट पेपर प्रणाली से कराने की दिशा में जनजागृति और दबाव निर्माण करना। विकसित देशों जैसे जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और नीदरलैंड ने जब ईवीएम को अलविदा कह दिया, तब भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में यह सवाल और भी प्रासंगिक हो गया है।
“अगर दुनिया के विकसित लोकतंत्र बैलेट पेपर की ओर लौट सकते हैं, तो भारत क्यों नहीं?” — यह सवाल कुनाल राऊत ने उठाया है, और आज हजारों नागरिक उनकी इस सोच से सहमत होते जा रहे हैं।
इस आंदोलन की गंभीरता और पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए 14 जुलाई 2025 को शाम 5 बजे पत्रकार भवन, सिविल लाइंस, नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई है। इसमें बैलेट पेपर की आवश्यकता, ईवीएम पर संदेह के आधार और जनता की भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला जाएगा।
कुनाल राऊत का मानना है कि “लोकतंत्र सिर्फ वोट डालने से नहीं चलता, बल्कि यह सुनिश्चित करना ज़रूरी है कि हर वोट गिने भी सही जाए, और उस पर जनता का विश्वास बना रहे।”
उनकी यह दूरदृष्टि और साहसी नेतृत्व उन्हें महाराष्ट्र में लोकतांत्रिक मूल्यों के एक सशक्त प्रहरी के रूप में उभार रही है। एक ओर जहाँ कई लोग चुप्पी साधे बैठे हैं, वहीं कुनाल राऊत और उनकी टीम ने लोकतंत्र की रक्षा का बिगुल बजा दिया है।
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