२२ जुलाई को निकलेगा बाबा ताजुद्दीन का शाही संदल : १०३वें सालाना उर्स के अवसर पर हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्ट का भव्य आयोजन, देशभर से उमड़ेंगे अकीदतमंद

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२२ जुलाई को निकलेगा बाबा ताजुद्दीन का शाही संदल

१०३वें सालाना उर्स के अवसर पर हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्ट का भव्य आयोजन, देशभर से उमड़ेंगे अकीदतमंद

नागपुर, २० जुलाई २०२५ – सूफी संत हज़रत बाबा सैयद मोहम्मद ताजुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह के १०३वें सालाना उर्स की छब्बीसवीं शरीफ के पावन अवसर पर मंगलवार, २२ जुलाई को उनका ऐतिहासिक शाही दरबारी संदल बड़े अदब और अकीदत के साथ निकाला जाएगा। यह संदल सुबह १० बजे हजरत बाबा ताजुद्दीन ट्रस्ट कार्यालय से रवाना होगा और शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ शाम तक ताजबाग़ में वापस पहुंचेगा।

संदल रवाना होने से पूर्व ट्रस्ट कार्यालय में पारंपरिक दस्तारबंदी की रस्म अदा की जाएगी, जिसमें ट्रस्ट के चेयरमैन श्री प्यारे जिया खान साहब, सचिव श्री ताज अहमद राजा साहब, उपाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र जिचकार साहब, ट्रस्टीगण फ़ारूकभाई बावला, हाजी इमरान खान ताज़ी, गजेंद्रपाल सिंह लोहिया, एवं मुस्तफाभाई टोपीवाला की प्रमुख उपस्थिति रहेगी।

इसके पश्चात बाबा की शान में महफिल-ए-शमा का आयोजन किया जाएगा। संदल के ताजबाग़ लौटने के बाद हज़रत बाबा ताजुद्दीन की मजार शरीफ पर ट्रस्ट की जानिब से संदल और चादर पेश की जाएगी और दुआ की जाएगी।

इस अवसर पर दिनभर विविध धार्मिक व रूहानी कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। बाबा ताजुद्दीन रह.अ. के उर्स की छवि पूरे देश में है और हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालु बड़ी संख्या में ताजबाग़ पहुंच रहे हैं। ट्रस्ट की ओर से सभी अकीदतमंदों से उर्स में शिरकत करने की अपील की गई है।

हजरत बाबा ताजुद्दीन का सालाना उर्स आगामी २९ जुलाई २०२५ तक जारी रहेगा।

“हमारे अंदर जो नेकी की ताकत है, उसे ‘हुसैन’ कहते हैं” – मौलाना अमीनुल कादरी

ताजबाग़ में आयोजित तक़रीर में उमड़ा जनसैलाब, इमाम हुसैन की सीख को बताया आत्मा की राह

बाबा ताजुद्दीन रहमतुल्लाह अलैह के उर्स मुबारक के मौके पर ताजबाग़ में एक विशेष धार्मिक तक़रीर का आयोजन हुआ, जिसमें विश्वप्रसिद्ध इस्लामी विद्वान मौलाना सैयद अमीनुल कादरी साहब ने भावुक और प्रेरणादायी संबोधन दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमीरे शरीअत मुफ्ती अब्दुल कदीर खान साहब ने की।

मौलाना अमीनुल कादरी ने अपने प्रवचन में कहा,

> “हमारे अंदर इमाम हुसैन भी हैं और यज़ीद भी। लेकिन हमें तय करना होगा कि हम किसे जिन्दा रखें। नेकी की ताकत को हुसैन कहते हैं और बदी की ताकत को यज़ीद। दिल हमें नेक रास्ते पर ले जाता है — वही हुसैन है। जबकि नफ़्स, जो बुराई की ओर धकेलता है — वह यज़ीद है।”

उन्होंने आगे कहा कि हजरत बाबा ताजुद्दीन रह.अ. ने भी समाज को भलाई, सत्य, सौहार्द्र और इंसानियत की राह पर चलने की तालीम दी। तक़रीर के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मौजूद रही, जो मौलाना की हर बात पर ‘नारे तकबीर’ से प्रतिक्रिया देती रही।

कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन गयासुद्दीन अशरफ़ी द्वारा किया गया। ट्रस्ट के समस्त पदाधिकारी भी इस अवसर पर मंच पर उपस्थित रहे।

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