सिंधी भाषा को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने की मांग — नीलम रहेवानी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन
नागपुर, 25 जुलाई 2025:
सिंधी भाषा को भारत के सभी राज्यों के स्कूलों के पाठ्यक्रम में एक विषय के रूप में शामिल करने की मांग को लेकर सिंधी महिला सेवा मंच की ओर से एक प्रतिनिधि मंडल ने आज नागपुर जिलाधिकारी कार्यालय के माध्यम से भारत के प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और राज्य के शिक्षा मंत्री को औपचारिक ज्ञापन सौंपा।
इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सिंधी महिला सेवा मंच की संस्थापक अध्यक्ष नीलम रहेवानी ने किया। उन्होंने अपने ज्ञापन में कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन से पूर्व सिंध प्रांत भारत का अभिन्न हिस्सा था, पर 1947 में देश की आजादी के बाद विभाजन की विभीषिका के चलते सिंधी समाज को अपनी मातृभूमि सिंध को छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा। देश के विभिन्न हिस्सों में बिखरकर बसे सिंधी समाज को आज तक एकजुट होकर अपनी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
नीलम रहेवानी ने कहा कि विभाजन के बाद सिंधी समाज भारत के अनेक प्रांतों में जाकर बस गया, लेकिन कहीं भी उन्हें एक समग्र ‘सिंध प्रांत’ के रूप में संगठित स्थान नहीं मिल सका। विभिन्न भाषाई और सांस्कृतिक परिवेशों में बसने के कारण सिंधी भाषा और संस्कृति को गंभीर क्षति पहुंची है। आज स्थिति यह है कि सिंधी भाषा तेजी से लुप्त होती जा रही है और नई पीढ़ी के लिए वह एक अपरिचित भाषा बनती जा रही है।
प्रतिनिधि मंडल ने सरकार से मांग की है कि सिंधी भाषा को सभी राज्यों के स्कूल पाठ्यक्रमों में एक वैकल्पिक विषय के रूप में सम्मिलित किया जाए, ताकि भाषा के संरक्षण और संवर्धन का मार्ग प्रशस्त हो सके। यह कदम सिंधी समाज के सांस्कृतिक अस्तित्व को बचाने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते समय मंच की सक्रिय सदस्य रितु रहवानी, कशिश वाधवानी, दिया रामचंदानी, किरण वलेचा, आशा सावलानी और ममता रामचंदानी भी उपस्थित थीं।
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