देश में कपास उत्पादकता बढ़ाने के लिए अतिघन (HDPS) पद्धति लाभकारी – डॉ. वी. एन. वाघमारे

Khozmaster
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देश में कपास उत्पादकता बढ़ाने के लिए अतिघन (HDPS) पद्धति लाभकारी – डॉ. वी. एन. वाघमारे

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा वस्त्र मंत्रालय के संयुक्त प्रयास से भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद – केंद्रीय कपास अनुसंधान संस्थान (ICAR-CICR) द्वारा कपास उत्पादन बढ़ाने हेतु आधुनिक खेती की पद्धतियों का बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी कड़ी में CITI-CDRA महाराष्ट्र की ओर से 23 जुलाई को वर्धा और नागपुर जिलों के परियोजना किसानों के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में डॉ. वी. एन. वाघमारे (निदेशक, CICR), डॉ. अरविंद वाघमारे (निदेशक, DOCD, कृषि मंत्रालय), डॉ. अर्जुन तायडे (मुख्य नोडल अधिकारी, SPC-CICR) और उमेश घाटगे (उप निदेशक, कृषि विभाग) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डॉ. नलिनी भोयर (DSAO, वर्धा) और जी. एच. वैराले (परियोजना समन्वयक, CITI-CDRA महाराष्ट्र) विशेष अतिथि थे।

प्रास्ताविक भाषण में गोविंद वैराले ने पिछले दो वर्षों में महाराष्ट्र में परियोजना की सफल कार्यान्वयन की जानकारी दी और बताया कि चालू वर्ष का 2000 एकड़ का लक्ष्य पूर्ण रूप से प्राप्त कर लिया गया है। इस वर्ष सांगली जिले में एक्स्ट्रा लॉन्ग स्टेपल (ELS) कपास परियोजना भी सफलतापूर्वक शुरू की गई है।

डॉ. अर्जुन तायडे ने देश के आठ राज्यों में परियोजना के सफल क्रियान्वयन का विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि कपास उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को अतिघन रोपण (High Density Planting System) पद्धति अपनानी चाहिए। डॉ. नलिनी भोयर ने कपास के मूल्यवर्धन और उसकी प्रसंस्करण की आवश्यकता पर बल दिया।

डॉ. वी. एन. वाघमारे ने कहा कि कपास विशेष परियोजना के कारण देशभर में कपास उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्धा जिले के किसान दिलीप पोहाणे ने प्रति एकड़ 24 क्विंटल उत्पादन प्राप्त किया, जिसके लिए उनका शाल व श्रीफल देकर सम्मान किया गया।

इस अवसर पर डॉ. अरविंद वाघमारे ने जल्द ही शुरू होने वाले राष्ट्रीय कपास अभियान की जानकारी दी और किसानों से सरकार द्वारा दी जा रही आर्थिक सहायता का लाभ लेने का आग्रह किया। उमेश घाटगे ने बेसल डोज (मूलखत) उर्वरक के सही उपयोग पर जोर दिया।

मान्यवरों के साथ संवाद करते हुए किसानों ने बताया कि अतिघन रोपण पद्धति से पारंपरिक खेती की तुलना में अधिक उत्पादन और लाभ प्राप्त हुआ है।

कार्यशाला के दूसरे सत्र में CICR के वैज्ञानिक डॉ. रामकृष्ण, डॉ. बाबासाहेब फुंद, डॉ. शैलेश गावंडे और डॉ. मणिकंडन ने कपास की उन्नत खेती तकनीकों पर मार्गदर्शन किया। कार्यक्रम का संचालन जगदीश नेरलवार और युगांतर मेश्राम ने किया तथा अमित कवाड़े ने आभार व्यक्त किया। इस कार्यशाला में 100 से अधिक किसान उपस्थित थे।

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