संतान के लिये
माँ-बाप क्या नहीं करते
वो सब करते हैं
जो उनके वश मेँ होता है,
कभी कभी तो वो भी
करने की कोशिश करते हैं
जो उनके वश मेँ नहीं भी होता,
इस करने मेँ ना एहसान
ना छल और ना दिखावा,
इस बारे मेँ भला कौन
रोज नये नये गीत कहेगा,
ये होता आया है, हो रहा है
और सदैव होता रहेगा,
गीत तब लिखे जाते हैं
जब कोई श्रवण बनता है,
संतान माँ-बाप के लिये
जब कुछ करती है
तब नई कहानी बनती है,
बेटी बेटा जब कभी
माँ बाप के लिये
उनकी पसंद का कुछ लाते हैं,
माँ बाप के वास्ते वो पल
सबसे खास बन जाते हैं,
सभी के जीवन मेँ
ऐसे पलों की संख्या
बस गिनती की होती है,
कोई इसमें करे भी क्या
नियति ऐसी ही होती है।
[ गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर]
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