जातिगत जनगणना सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम – इरफान मलनस

Khozmaster
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जातिगत जनगणना सामाजिक न्याय की दिशा में ठोस कदम – इरफान मलनस

– यवतमाळ से विशेष रिपोर्ट

यवतमाळ जिल्हा अध्यक्ष श्री इरफान इब्राहिम मलनस ने केंद्र सरकार द्वारा जातिगत जनगणना का गजट नोटिफिकेशन जारी किए जाने पर इसे “ऐतिहासिक और क्रांतिकारी निर्णय” करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक प्रगति है।

इरफान मलनस ने कहा, “जातिगत जनगणना फॉर्म भरते समय सभी नागरिकों को अपनी जाति की सही जानकारी देनी चाहिए। किसी के बहकावे में न आएं। यह एक ऐसी पहल है जिससे पहली बार मुस्लिम समाज के भीतर मौजूद जातीय विविधता की स्पष्ट और विस्तृत गिनती की जाएगी। अब तक मुस्लिम समुदाय को केवल एक धार्मिक समूह के रूप में दर्ज किया जाता रहा है, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक उपवर्गों की पहचान नहीं हो पाती थी।”

उन्होंने कहा कि इस जनगणना के माध्यम से मुस्लिम समुदाय की सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति से जुड़े ठोस आंकड़े सामने आएंगे, जो सामाजिक न्याय की दिशा में नीति निर्माण का आधार बन सकते हैं। “जाति भारतीय संस्कृति का हिस्सा रही है और मुस्लिम समाज भी इस विविधता से अछूता नहीं है। इस पहल से मुस्लिम समाज के भीतर व्याप्त विविधता को पहचान मिलेगी और ‘एकरूप मुस्लिम’ की धारणा को चुनौती मिलेगी,” उन्होंने जोड़ा।

इरफान मलनस ने यह भी कहा कि “मुस्लिम समाज में 85 फीसदी आबादी पसमांदा मुसलमानों की है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े हुए हैं, लेकिन उन्हें राजनीतिक और सामाजिक प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। ठोस आंकड़ों के अभाव में उनकी आवाज़ अनसुनी रह जाती है। सच्चर कमिटी और रंगनाथन आयोग की रिपोर्टें इस स्थिति की पुष्टि करती हैं।”

उन्होंने कहा कि “मोदी सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम पसमांदा समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवसर है। महाराष्ट्र का मुस्लिम समाज इसके लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करता है।”

इरफान मलनस ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पर भी सवाल उठाए और कहा कि “जो संगठन मुस्लिम प्रतिनिधित्व का दावा करता है, उसमें एक भी पसमांदा मुसलमान शामिल नहीं है। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”

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