नागपुर जेल से 18 कैदियों की रिहाई — अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष प्यारे ख़ान ने इंसानियत का निभाया फर्ज़!
(खोजमास्टर न्यूज़ | उमैर अंसारी, नागपुर)
नागपुर, 4 जुलाई — नागपुर की केंद्रीय जेल में बंद 18 कैदियों के जीवन में गुरुवार का दिन एक नई रोशनी लेकर आया। महाराष्ट्र राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे ख़ान की मानवीय पहल के चलते इन कैदियों को जेल की दीवारों से बाहर खुली हवा में साँस लेने का अवसर मिला।
इन सभी कैदियों को अदालत से ज़मानत तो मिल चुकी थी, लेकिन आर्थिक तंगी के कारण वे ₹2,000 से ₹50,000 तक की ज़मानत राशि जमा नहीं कर पा रहे थे। प्यारे ख़ान ने यह ज़िम्मेदारी अपने कंधों पर लेते हुए सभी 18 कैदियों की ज़मानत राशि स्वयं अदा की और उनकी रिहाई का मार्ग प्रशस्त किया।
पहले चरण में गुरुवार को 14 कैदियों को रिहा किया गया, जबकि शेष 4 को भी जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा।
4 जून को जब प्यारे ख़ान ने नागपुर जेल का दौरा किया, तो उन्हें पता चला कि कई ऐसे कैदी हैं जिन्हें अदालत से ज़मानत मिल चुकी है, लेकिन पैसों के अभाव में वे आज भी सलाखों के पीछे हैं। उन्होंने तुरंत जेल अधीक्षक वैभव आग्रे और जिला न्यायिक अधिकारी ऋषिकेश ढाले से ऐसे कैदियों की सूची तैयार करने को कहा — जो न तो कुख्यात अपराधी हैं, न ही आदतन अपराधी, और जिनका जेल में व्यवहार सराहनीय रहा है।
जेल प्रशासन और अधिवक्ताओं के सहयोग से 18 पात्र कैदियों की सूची तैयार हुई। इसके बाद प्यारे ख़ान ने इन सभी की ज़मानत राशि भर दी और समाज के सामने एक जीवंत उदाहरण पेश किया।
रिहाई के बाद प्यारे ख़ान ने कैदियों को संबोधित करते हुए कहा
> “अपराध का रास्ता व्यक्ति, परिवार और समाज — तीनों के लिए विनाशकारी होता है। सुधार का अर्थ केवल जेल से बाहर आना नहीं, बल्कि जीवन को नई दिशा देने का संकल्प ही असली बदलाव है।”
रिहा हुए कैदी भी भावुक हो उठे। उन्होंने प्यारे ख़ान का आभार व्यक्त करते हुए यह वचन दिया कि वे फिर कभी अपराध की राह नहीं अपनाएंगे।
> “ख़ान साहब का ये उपकार हम ताउम्र नहीं भूलेंगे,” उन्होंने कहा।
यह मानवीय पहल जेल सुधार और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक प्रेरणास्पद कदम बनकर उभरी है। जेल प्रशासन, न्यायिक व्यवस्था और सामाजिक नेतृत्व के समन्वय का यह उदाहरण अब अन्य राज्यों और संगठनों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।
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