नागपुर में प्रशासन पर परमिट रूम संगठनों का बड़ा हमला — बेकाबू अवैध शराब बिक्री पर पुलिस-एक्साइज विभाग पर गंभीर आरोप
‘चाइनीज़ ठेले और ढाबों पर खुलेआम चल रही अवैध शराब बिक्री, जिम्मेदार अधिकारी कर रहे अनदेखी’ — प्रेस क्लब में पत्रकार परिषद में उठी आवाज़
नागपुर | खोजमास्टर संवाददाता
नागपुर शहर और ग्रामीण क्षेत्र के परमिट रूम संगठनों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं कि शहर और ग्रामीण इलाकों में अवैध शराब बिक्री धड़ल्ले से चल रही है, लेकिन पुलिस और एक्साइज विभाग आंख मूंदे बैठे हैं।
यह आरोप नागपुर जिला रेस्टोरेंट परमिट रूम एसोसिएशन और नागपुर ग्रामीण बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने अलग-अलग पत्रकार परिषद में लगाए।
पदाधिकारियों का कहना है कि सड़क किनारे चाइनीज़ गाड़ियों, ठेलों और ढाबों पर बिना लाइसेंस के शराब खुलेआम बेची जा रही है। इसे रोकने की जिम्मेदारी पुलिस और उत्पाद शुल्क विभाग की है, लेकिन दोनों विभाग मिलकर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
‘मुख्यमंत्री-गृह मंत्री का शहर, फिर भी प्रशासन मौन’
नागपुर वही शहर है जहां से राज्य के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री चुनकर आते हैं। ऐसे में यहां प्रेस क्लब जैसी प्रतिष्ठित जगह पर अगर संगठनों के प्रतिनिधि सार्वजनिक मंच से ऐसे गंभीर आरोप लगा रहे हैं तो प्रशासन को इस पर तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
ग्रामीण बार एसोसिएशन ने उठाया टैक्स चोरी का मुद्दा
नागपुर ग्रामीण बार एसोसिएशन ने वाइन शॉप्स पर और भी बड़े आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि शहर में कई वाइन शॉप्स बिना बिल के शराब बेच रही हैं। ग्राहकों की उम्र की पुष्टि नहीं होती, लाइसेंस भी सही से नहीं चेक किया जाता। उन्होने कहा कि करीब 50% बार गैरकानूनी तरीके से वाइन शॉप्स से शराब लेकर बिना बिल के ग्राहकों को बेचते हैं, जिससे टैक्स चोरी हो रही है। उनका यह भी आरोप है कि वाइन शॉप्स की लॉबी इतनी मजबूत है कि उन्हें टैक्स में भी विशेष रियायतें मिलती हैं।
परमिट रूम संचालकों पर टैक्स और फीस का बोझ
गौरतलब है कि नागपुर जिला रेस्टोरेंट परमिट रूम एसोसिएशन और ग्रामीण बार एसोसिएशन की प्रेस कॉन्फ्रेंस का असली मकसद परमिट रूम पर लगे 10% वैट टैक्स का विरोध था। संगठनों ने बताया कि पहले सिर्फ 5% टैक्स लगता था, जिसे पिछले साल नवंबर से बढ़ाकर 10% कर दिया गया। इसके अलावा नवीनीकरण शुल्क में भी 15% की बढ़ोतरी कर दी गई है और एक्साइज ड्यूटी में 150% तक इजाफा कर दिया गया है।
संगठनों का आरोप है कि इस भारी टैक्स बोझ ने परमिट रूम व्यवसाय को चौपट करने की कगार पर ला खड़ा किया है। उनका कहना है कि पिछले दो सालों से मुख्यमंत्री, वित्त मंत्री और संबंधित अधिकारियों को ज्ञापन देकर इस अन्याय को दूर करने की मांग की जा रही है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
14 जुलाई को विदर्भ बंद, मोर्चा कलेक्टर ऑफिस तक
अपनी मांगों को लेकर संगठनों ने ऐलान किया है कि 14 जुलाई को विदर्भ के सभी परमिट रूम एक दिन के लिए बंद रहेंगे। संविधान चौक से कलेक्टर ऑफिस तक मोर्चा निकाला जाएगा और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। पदाधिकारियों ने कहा कि अगर सरकार ने जल्द से जल्द मांगें नहीं मानीं तो प्रतीकात्मक बंद को बड़े आंदोलन में बदला जाएगा।
कार्रवाई की मांग
दोनों संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि अवैध शराब बिक्री और टैक्स चोरी के आरोपों पर तुरंत संज्ञान लिया जाए और जिम्मेदार पुलिस व एक्साइज अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए ताकि परमिटरूम व्यवसाय को न्याय मिल सके।
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