पीएम आवास के निवासियों का एसटीपी परियोजना के खिलाफ एल्गार : एनएमआरडीए को सौंपा गया ज्ञापन

Khozmaster
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पीएम आवास के निवासियों का एसटीपी परियोजना के खिलाफ एल्गार : एनएमआरडीए को सौंपा गया ज्ञापन

नागपुर, 24 जुलाई —

तरोड़ी (खुर्द) स्थित प्रधानमंत्री आवास योजना कॉलोनी के परिसर में प्रस्तावित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के खिलाफ स्थानीय निवासियों ने जोरदार विरोध दर्ज किया है। इस परियोजना को अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग को लेकर आज नागरिकों की ओर से पूर्व जिला परिषद महिला एवं बाल कल्याण सभापति प्रो. अवंतिका लेकुरवाळे ने एनएमआरडीए को ज्ञापन सौंपा।

यह विवादित जमीन खसरा क्र. 62 के अंतर्गत आती है, जिसे पहले सुविधा क्षेत्र (अमिनिटी स्पेस) और कम्युनिटी हॉल के लिए आरक्षित किया गया था। लेकिन अब नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) ने अचानक आरक्षण में बदलाव कर वहां ₹105 करोड़ 76 लाख की लागत वाला एसटीपी प्रकल्प मंजूर किया है, जिसका काम भी शुरू हो गया है। इस निर्णय के खिलाफ कॉलोनीवासियों ने कड़ा विरोध जताया है।

निवासियों की आपत्ति क्यों?

वर्ष 2017 में शुरू हुई इस योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को कम दर पर आवास आवंटित किए गए थे। आज करीब 3780 लोग यहां के 945 फ्लैट्स में रह रहे हैं। शुरुआत से ही अपूर्ण और अधूरे कार्यों के कारण नागरिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब उनके लिए आरक्षित स्थान पर एसटीपी बनाना उनके मूल अधिकारों का हनन है, ऐसा आरोप उन्होंने लगाया है।

प्रो. लेकुरवाळे ने नगर पंचायत बिडगांव के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एनएमआरडीए के कार्यकारी अभियंता ललित राऊत को ज्ञापन सौंपते हुए इस परियोजना को तत्काल अन्यत्र स्थानांतरित करने की मांग की है।

लंबी चर्चा और गंभीर सवाल

एनएमआरडीए के कार्यकारी अभियंता से चर्चा करते हुए प्रो. लेकुरवाळे ने कहा कि यह एसटीपी प्रकल्प पहले पांढुर्णा में प्रस्तावित था, तो फिर वह तरोड़ी में, वह भी आवास योजना की आरक्षित भूमि पर कैसे आया? उन्होंने सवाल उठाया कि यदि परियोजना स्थल बदला गया है तो उसका उल्लेख विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में क्यों नहीं किया गया?

नागरिकों के अधिकारों का हनन

आरक्षण बदलते समय निवासियों से कोई चर्चा नहीं की गई, न ही उन्हें इसकी पूर्व जानकारी दी गई। इस तरह का निर्णय लेकर नागरिकों को अंधेरे में रखना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। निवासियों का यह भी कहना है कि एसटीपी के कारण भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

प्रो. लेकुरवाळे ने स्पष्ट कहा, “निवासियों का यह विरोध न्यायसंगत है, और मैं उनके साथ हूं।”

इस पर कार्यकारी अभियंता ललित राऊत ने चर्चा के दौरान आश्वासन दिया कि “नागरिकों से संवाद कर सभी बातों को स्पष्टरूप से बताया जाएगा।”

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