100 करोड़ की शालार्थ घोटाला: दो शिक्षा अधिकारी गिरफ्तार, साइबर पुलिस की बड़ी कार्रवाई
अब तक 12 आरोपी हिरासत में, फर्जी आदेशों के जरिए वेतन निकासी कर शासन को भारी चूना
नागपुर, 30 जुलाई 2025 – प्रतिनिधि
नागपुर शहर के शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का एक बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें शालार्थ प्रणाली का दुरुपयोग कर शासन को करीब 100 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाई गई है। नागपुर साइबर पुलिस ने इस हाई-प्रोफाइल घोटाले में दो वरिष्ठ शिक्षा अधिकारियों को गिरफ्तार किया है, जिससे पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
यह घोटाला तब उजागर हुआ जब रविंद्र ज्ञानेश्वर पाटिल, कनिष्ठ प्रशासन अधिकारी, विभागीय शिक्षा उपसंचालक कार्यालय, नागपुर ने साइबर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि बिना वैध शालार्थ आदेशों के फर्जी आईडी और ड्राफ्ट तैयार कर शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को गलत तरीके से वेतन भुगतान किया गया।
अब तक की जांच में चौंकाने वाले खुलासे:
साइबर पुलिस ने दर्ज अपराध क्रमांक 24/2025 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 315(4), 335, 336(3), 340(1), 340(2), 61(2) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(क) के अंतर्गत मामला दर्ज किया है।
पुलिस जांच में अब तक 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें
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3 विभागीय शिक्षा उपसंचालक,
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1 शिक्षा अधिकारी,
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कई लिपिक,
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स्कूलों के मुख्याध्यापक और संचालक शामिल हैं।
गिरफ्तार अधिकारी:
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हिदेश्वर श्रीराम काजुसे (उम्र 70 वर्ष) — वर्ष 2004 से शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत। इनके कार्यकाल में 154 फर्जी शिक्षक/शिक्षकेतर कर्मचारियों को वेतन जारी किया गया, जबकि उनके शालार्थ आदेश अस्तित्व में ही नहीं थे।
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रोहिणी विठोबा कुंभार (उम्र 49 वर्ष) — वर्ष 2004 से 2022 तक शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्यरत। इनके द्वारा 244 नवप्रविष्ट कर्मचारियों के लिए वैध आदेशों के बिना वेतन प्रक्रिया चलाई गई।
पुलिस कार्रवाई:
इन दोनों अधिकारियों को 30 जुलाई को गिरफ्तार किया गया और प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, कोर्ट क्रमांक 6, नागपुर के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय ने दोनों को न्यायिक हिरासत (ज्यूडिशियल कस्टडी) में भेजने का आदेश दिया है।
पुलिस ने बताया कि इस घोटाले में अभी और भी कई बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
वरिष्ठ न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
क्या है शालार्थ प्रणाली?
शालार्थ (शाला + अर्थ) एक ऑनलाइन पोर्टल है जिसके माध्यम से सरकारी व अनुदानित स्कूलों में नियुक्त शिक्षक/कर्मचारियों की जानकारी दर्ज कर वेतन प्रक्रिया संचालित की जाती है। इस प्रणाली के दुरुपयोग से शिक्षा विभाग में पारदर्शिता के नाम पर बड़ा घोटाला सामने आया है।
जांच जारी है और और भी गिरफ्तारियां संभव:
इस हाई-प्रोफाइल मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो पूरी साजिश की परतें खोलने में जुटा है।
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