नागपुर में IVF डोनर प्रक्रिया से जुड़ी बड़ी लापरवाही! 23 वर्षीय महिला की मौत, परिजनों ने अस्पताल और दो परिचितों को ठहराया जिम्मेदार

नागपुर। शहर में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को सदमे में डाल दिया है। कामठी निवासी 23 वर्षीय निकिता विशाल डोंगरे की मौत इंदिरा IVF हॉस्पिटल, सदर में डोनर एग प्रक्रिया के दौरान हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के साथ-साथ पड़ोसी बादल देशभ्रतार (30) और उसकी पत्नी प्रियंका (23) को इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

निकिता का जीवन बेहद साधारण था। वह अपने पति विशाल डोंगरे (23) और दो वर्षीय बेटे मिहिर के साथ छोटे से घर में रहती थी। विशाल मज़दूरी करके परिवार का भरण-पोषण करता था। परिजनों के अनुसार, बादल और प्रियंका ने निकिता को ₹15,000 कमाने का लालच देकर एग डोनेशन के लिए तैयार किया और उसे कहा कि यह बात अपने पति को न बताए।

16 जुलाई को विशाल के काम पर होने के दौरान, दोनों आरोपी निकिता को इंदिरा IVF हॉस्पिटल ले गए। बताया जा रहा है कि करीब 10 दिनों तक यह प्रक्रिया चलती रही। 27 जुलाई को, जब विशाल घर पर था, बादल और प्रियंका फिर से निकिता को चुपचाप अस्पताल ले गए। इसी दिन अंडे निकालने की प्रक्रिया के दौरान निकिता की हालत अचानक बिगड़ गई।
हॉस्पिटल स्टाफ ने बादल को फोन कर बताया कि निकिता का बीपी लो हो गया है और उसे तुरंत दूसरे अस्पताल (मेडिटेरिना) रेफर करना पड़ा। लेकिन 29 जुलाई की सुबह 9 बजे निकिता की मौत हो गई।
यह खबर सुनते ही परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। परिजन न्याय की मांग को लेकर पहले बर्डी, फिर कामठी और अंत में सदर थाने पहुंचे। निकिता का पोस्टमार्टम मेडिकल कॉलेज में कराया गया। इस दौरान नागपुर शहर कांग्रेस कमेटी अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष वसीम खान भी परिवार के साथ खड़े रहे।

पोस्टमार्टम के बाद दोपहर 3 बजे शव परिवार को सौंपा गया। ग़म और गुस्से से भरे परिजन शव को ऑटो में रखकर सदर थाने पहुंचे, जहां करीब दो घंटे तक पुलिस अधिकारियों से बहस होती रही।
परिजनों का कहना है कि इंदिरा IVF हॉस्पिटल की गंभीर लापरवाही से निकिता की जान गई, जबकि बादल और प्रियंका, जिन्होंने उसे इस प्रक्रिया में फंसाया, घटना के बाद से फरार हैं।

आख़िरकार सदर थाने के पीआई मनीष ठाकरे ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया, जिसके बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए भेजा गया। पुलिस ने परिवार के कुछ सदस्यों को बयान के लिए फिर बुलाया है।
यह घटना IVF और एग डोनेशन प्रक्रियाओं में सुरक्षा, पारदर्शिता और निगरानी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े करती है। इस घटना ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि लालच और लापरवाही मिलकर किस तरह मासूम ज़िंदगियां निगल रही हैं।
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