नागपुर आरटीओ में बड़ा खुलासा: ‘फेसलेस’ ऑनलाइन सेवा के दुरुपयोग से फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस रैकेट का पर्दाफाश, तीन एजेंटों पर गिरी गाज
नागपुर: शहर के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) में एक सनसनीखेज फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है, जिसमें कुछ एजेंटों ने हाल ही में शुरू की गई ‘फेसलेस’ ऑनलाइन सेवा का दुरुपयोग कर लोगों को बिना परीक्षा दिए लर्नर लाइसेंस उपलब्ध कराए। इस रैकेट ने न केवल नियमों की धज्जियां उड़ाईं, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा किया।
जांच में सामने आया कि ये एजेंट ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली को हैक कर उम्मीदवारों को अनियमित तरीके से लाइसेंस दिला रहे थे। कई आवेदकों ने अपना वन-टाइम पासवर्ड (OTP) इन एजेंटों के साथ साझा किया, जिन्होंने उनकी जगह पूरी प्रक्रिया पूरी की। एजेंटों ने e-KYC वेरिफिकेशन को दरकिनार कर आधार से जुड़े मोबाइल नंबरों पर आए OTP का उपयोग किया, और वेबसाइट कोडिंग में छेड़छाड़ कर ‘फेस ऑथेंटिकेशन’ प्रक्रिया को भी ध्वस्त कर दिया। कुछ मामलों में पूर्व-रिकॉर्ड की गई तस्वीरों और बॉट्स का सहारा लेकर यह धोखाधड़ी की गई।
करीब एक साल से चल रहे इस रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब सहायक मोटर वाहन निरीक्षक ने फेसलेस सिस्टम की मॉनिटरिंग के दौरान संदिग्ध गतिविधियों पर नजर डाली। प्रारंभिक जांच के बाद आरटीओ ने सीताबर्डी पुलिस स्टेशन में तीन व्यक्तियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई और सभी फर्जी लर्नर लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिए।
शहर के क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी किरण बिडकर ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा,
“फेसलेस सिस्टम का दुरुपयोग कर बिना परीक्षण के लाइसेंस हासिल करना न केवल अवैध है, बल्कि सड़क सुरक्षा के लिए सीधा खतरा है। ऐसे सभी फर्जी लाइसेंस रद्द किए जाएंगे और दोषियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
अधिकारियों ने आम जनता से अपील की है कि वे लाइसेंस की प्रक्रिया में किसी भी दलाल या एजेंट की मदद न लें, बल्कि केवल वैध और अधिकृत माध्यमों से ही आवेदन करें। यह कार्रवाई नागपुर आरटीओ की सतर्कता और ईमानदार प्रयासों का परिणाम है, जिसने एक बड़े फर्जीवाड़े को समय रहते रोककर सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है।
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