एम्स नागपुर में एमबीबीएस इंटर्न ने की आत्महत्या, हॉस्टल के बाथरूम में लटका मिला शव – मेडिकल संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर फिर उठे सवाल
नागपुर | 4 अगस्त 2025
एम्स नागपुर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल संस्थान बल्कि पूरे मेडिकल समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। 22 वर्षीय एमबीबीएस इंटर्न संकत पंडित्राव डभाडे, जो परभणी जिले के जिंतूर का रहने वाला था, ने अपने हॉस्टल के बाथरूम में कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
सूत्रों के अनुसार, यह दर्दनाक घटना चरक हॉस्टल की नौवीं मंजिल पर स्थित कमरे नंबर 909 में घटी। संकत शनिवार रात से ही कमरे से बाहर नहीं आया था। रविवार सुबह जब उसके साथियों ने दरवाजा खटखटाया और कोई जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने तुरंत प्रशासन को सूचना दी। दरवाजा तोड़े जाने पर उसका शव बाथरूम में एक शॉल से लटका मिला।
सुसाइड नोट बरामद, जांच में जुटी पुलिस
घटनास्थल से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। इसके साथ ही संकत का मोबाइल फोन भी फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। सोनगांव पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज किया है और आत्महत्या के पीछे के कारणों की गहन जांच की जा रही है।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से आने वाले दिनों में मौत की परिस्थितियों को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
देश के मेडिकल संस्थानों में बढ़ती आत्महत्या की घटनाएं – गंभीर संकेत
यह मामला कोई अकेली घटना नहीं है। इससे पहले भी एम्स पटना, दिल्ली और भोपाल जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में मेडिकल छात्रों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में एम्स पटना में एक एमडी छात्र ने आत्महत्या की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल पढ़ाई के दौरान छात्रों पर अत्यधिक शैक्षणिक दबाव, प्रतिस्पर्धा, थकावट और मानसिक अकेलेपन के चलते वे भीतर ही भीतर टूट जाते हैं। दुर्भाग्यवश, समय पर सहायता नहीं मिलने पर वे आत्मघाती कदम उठा लेते हैं।
मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रणाली की ज़रूरत
मेडिकल संस्थानों में इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए अब यह बेहद जरूरी हो गया है कि छात्र-छात्राओं के लिए एक मजबूत मानसिक स्वास्थ्य सहायता तंत्र विकसित किया जाए। इसमें नियमित काउंसलिंग सत्र, मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता अभियान, हेल्पलाइन सेवाएं और छात्रों के साथ संवाद की प्रणाली को सशक्त बनाना शामिल है।
एम्स नागपुर में पहले भी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए हैं, लेकिन इस तरह की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।
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