“सान्वी की मौत: स्कूलों की गेट बंद करने की ज़िद, समय की पाबंदी का दबाव, चालकों की मजबूरी, प्रशासन की लापरवाही और ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का काला सच”
🕘 देर से पहुँचे तो गेट बंद – और यहीं से शुरू होता है खेल
नागपुर की 14 वर्षीय सान्वी देवेंद्र खोब्रागड़े का हादसा केवल सड़क पर हुई एक दुर्घटना नहीं था। यह उस निर्दयी शिक्षा व्यवस्था का आईना है, जिसमें बच्चे की जान से ज़्यादा अहमियत “समय पर पहुँचना” को दी जाती है।
कई स्कूलों में यह कठोर नियम है कि 9 बजे के बाद पहुँचने वाली वैन या बस के बच्चों को अंदर आने नहीं दिया जाएगा। गेट बंद कर दिया जाता है, बच्चे बाहर खड़े रह जाते हैं।
🚌 दबाव में दौड़ती वैनें, जोखिम में मासूम ज़िंदगियाँ
इस नियम का सीधा असर उन चालकों पर पड़ता है जिन पर दर्जनों बच्चों की ज़िम्मेदारी होती है।
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देर से पहुँचने पर बच्चों को डाँट, क्लास छूटना और स्कूल का ताना झेलना पड़ता है।
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चालक को स्कूल प्रशासन की फटकार और गेट पर अपमान का सामना करना पड़ता है।
नतीजा?
👉 चालक तेज़ रफ़्तार अपनाते हैं। ट्रैफिक नियम दरकिनार कर बच्चों को हर हाल में 9 बजे से पहले स्कूल पहुँचाने की जुगत लगाते हैं।
सान्वी की वैन भी इसी दबाव की शिकार बनी और तेज़ रफ़्तार के कारण बस से टकराकर ज़िंदगी खत्म हो गई।
❌ हादसे के बाद स्कूल का पल्ला झाड़ना
सबसे शर्मनाक यह है कि हादसे के तुरंत बाद वही स्कूल प्रशासन बेशर्मी से बयान देता है –
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“वह वैन हमारी नहीं थी।”
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“वह चालक हमारे अधीन नहीं था।”
यानी जब तक बच्चे समय पर पहुँचते हैं, तब तक सब ठीक। लेकिन जैसे ही हादसा होता है, सारा दोष चालक और सड़क पर डाल दिया जाता है।
क्या यही है वह जिम्मेदारी जिस पर माता-पिता भरोसा करते हैं?
🧾 असली दोषी कौन?
दोष केवल चालक का नहीं, सड़क का भी नहीं।
असली दोषी है वह शिक्षा व्यवस्था जिसने –
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समय को सुरक्षा से बड़ा बना दिया।
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देर से आने वाले बच्चों को रोकने की अमानवीय नीति लागू की।
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और हादसे के बाद ज़िम्मेदारी से हाथ धो लिया।
सान्वी की मौत एक सिस्टमेटिक क्राइम है, और इस अपराध का गुनहगार है स्कूल प्रबंधन।
❓ कब बदलेगा यह सिस्टम?
यह सवाल नागपुर का ही नहीं, पूरे देश का है।
👉 कब तक स्कूल समय की पाबंदी को बच्चों की सुरक्षा से ऊपर रखेंगे?
👉 कब तक प्रशासन आँखें मूँदे रहेगा?
👉 क्या अब कानून नहीं बनना चाहिए कि देर से आए बच्चों को प्रवेश से वंचित करना अपराध माना जाए?
🔴 निष्कर्ष
सान्वी की मौत ने हमें सच्चाई दिखा दी है –
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दोषी चालक नहीं।
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दोषी सड़क नहीं।
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दोषी वह व्यवस्था है जिसने गेट बंद करके मासूम की कब्र खोदी।
सान्वी की कोई गलती नहीं थी। उसकी मौत का असली गुनहगार है वह स्कूल प्रबंधन जिसने समय की घड़ी को शिक्षा बना दिया और सुरक्षा को भुला दिया।
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