राज्यपाल बनने का सपना अधूरा रह गया : दिलीप पनकुले
नागपुर : पूर्व पार्षद दिलीप पनकुले ने कहा कि दिवंगत सांसद दत्ता मेघे का राज्यपाल बनने का सपना अधूरा ही रह गया। वे उनके सम्मान में आयोजित एक स्मारक सभा में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने मेघे के राजनीतिक और सामाजिक योगदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
पनकुले ने कहा कि मेघे एक दूरदर्शी और जनहितैषी नेता थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। चुनावों के दौरान उनकी रणनीति, भावनात्मक जुड़ाव और कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन देने की क्षमता उल्लेखनीय थी। उन्होंने कहा कि मेघे का स्वभाव बेहद सरल और न्यायप्रिय था, जो बिना किसी भेदभाव के हर व्यक्ति की मदद करने में विश्वास रखते थे।
अपने संबोधन में पनकुले ने बताया कि मेघे को अपने राजनीतिक सफर में शरद पवार का निरंतर मार्गदर्शन और सहयोग मिला। मंत्री पद से लेकर विपक्ष के नेता तक की उनकी यात्रा में यह समर्थन महत्वपूर्ण रहा, जिसके कारण वे राज्यसभा तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि यदि यह सहयोग अंत तक बना रहता, तो संभवतः उनका राज्यपाल बनने का सपना भी पूरा हो जाता।
उन्होंने यह भी बताया कि जीवन के अंतिम समय में मेघे अधिक अंतर्मुखी हो गए थे और कई बार भावुक हो जाते थे। वे अपने से छोटे कार्यकर्ताओं से भी विनम्रता के साथ क्षमा मांगते थे। पनकुले ने भावुक होते हुए कहा कि विदर्भ को मेघे जैसा निस्वार्थ और परोपकारी नेता फिर मिलना मुश्किल है।
इस शोक सभा की अध्यक्षता शेषराव खोडे ने की। कार्यक्रम में राजाभाऊ टंकसाले, जनबा मस्के सहित राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे, जिन्होंने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

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